दुनका। मोदी सरकार का आयुष्मान कार्ड ऐसा धोखा निकला कि एक्सीडेंट में घायल होने के बाद अचानक संकट में फंसे हरपाल वाल्मीकि के परिवार को उबरने का कोई रास्ता नहीं दिख रहा है। हरपाल का एक पैर कट चुका है और दूसरा कटने वाला है, लेकिन आयुष्मान में एक पैसे की मदद नहीं मिल पाई। घर की सारी जमापूंजी अस्पताल में खप चुकी है, अब परिवार भीख मांगकर इलाज करा रहा है, लेकिन इतना पैसा इकट्ठा नहीं हो पा रहा कि जान बचने की गारंटी हो जाए। अमर उजाला में खबर छपने के बाद सक्रिय हुआ प्रशासन अब आयुष्मान के बजाय हरपाल को सरकारी अनुदान दिलाने की बात कर रहा है लेकिन लंबी सरकारी प्रक्रिया पूरी होने के बाद उसकी जान बच पाएगी या नहीं, इसका भरोसा परिवार को भी नहीं हो पा रहा है।
आनंदपुर गांव में 11 अप्रैल की सुबह नौ बजे मजदूरी करके परिवार पालने वाले हरपाल वाल्मीकि को एक पिकअप गाड़ी यूके-05टीए-4211 ने उनके घर के बाहर टक्कर मार दी थी। गंभीर हालत में हरपाल को उनके घरवालों ने भोजीपुरा के मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया, लेकिन वहां आयुष्मान कार्ड दिखाया तो पता लगा कि वह ऑनलाइन ही नहीं है और उस पर एक पैसे का भी इलाज नहीं हो पाएगा। घरवालों ने नाते-रिश्तेदार से पैसा इकट्ठा करके करीब दो लाख रुपये हरपाल के इलाज पर फूंक दिए। दो लाख से भी काम नहीं चला तो आठ दिन बाद इस उम्मीद में उन्हें भोजीपुरा के मेडिकल कॉलेज से डिस्चार्ज कराकर दूसरे अस्पतालों में ले गए कि शायद वहां आयुष्मान कार्ड स्वीकार कर लिया जाए लेकिन सारे अस्पतालों ने आयुष्मान कार्ड चालू न होने की बात कहते हुए हरपाल को भर्ती करने से इंकार कर दिया। इस बीच घरवालों ने कुछ चंदा भी इकट्ठा किया, लेकिन उससे भी बात नहीं बनी तो हरपाल को घर ले आए।
आयुष्मान के धोखे में हरपाल की जान पर बन आने की खबर अमर उजाला में छपी तो बुधवार को एसडीएम के आदेश पर हल्के के लेखपाल संजय कुमार आनंदपुर पहुंचे और हरपाल की की हालत और आर्थिक स्थिति के बारे में जानकारी जुटाई। एसडीएम को दी रिपोर्ट में हरपाल की आर्थिक स्थिति काफी दयनीय बताते हुए उन्हें सरकारी अनुदान दिलवाने की प्रबल संस्तुति की है। हरपाल के गांव के लोगों का कहना है कि प्रशासन चाहे तो हरपाल को फौरन इलाज दिलाने का इंतजाम कर सकता है, लेकिन इसके बजाय सरकारी अनुदान का झांसा देकर टाल रहा है। वह भी इसलिए क्योंकि आयुष्मान कार्ड फर्जी निकलने के मामले में उनकी खुद की जवाबदेही बनती है।
.. और विधायक जी दो हजार देकर निपट गए
हरपाल का परिवार उनके इलाज पर लाखों फूंक चुका है और लाखों की और जरूरत है लेकिन अपनी ही सरकार की आयुष्मान भारत योजना के छलावे का शिकार हुए इस परिवार को क्षेत्रीय विधायक डॉ. डीसी वर्मा सिर्फ दो हजार देकर अपनी जिम्मेदारी से निपट गए। बुधवार को उन्होंने यह रकम पूर्व प्रधान बंटी सिंह के जरिये हरपाल के घर भिजवाई। उधर, अफसरों ने भी बहुत ज्यादा संवेदना नहीं दिखाई। एसडीएम ने लेखपाल को तो भेजा लेकिन खुद हरपाल को देखने जाने की जहमत नहीं उठाई। बता दें कि हरपाल के घायल होने के बाद उनके परिवार के लोगों ने आनंदपुर में मंगलवार और शनिवार को लगने वाली बाजार में दुकानों के आगे झाड़ू लगाना शुरू किया है, इसके बदले उन्हें कहीं से बची हुई साग-सब्जी तो कहीं से एक-दो- रुपये का मेहनताना मिल जाता है।
लेखपाल की रिपोर्ट के आधार पर प्रशासन गरीब दलित हरपाल वाल्मीकि को मुख्यमंत्री राहत कोष से चिकित्सा अनुदान दिलवाने के लिए गंभीरता से प्रयासरत है। आयुष्मान कार्ड की भी जांच कराई जा रही है। उसे भी चालू कराकर अस्पताल में उनका इलाज करवाने की पूरी कोशिश की जाएगी। -रोहित यादव, एसडीएम मीरगंज