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इविवि में विरोध के बीच मना स् थापना दिवस

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स्थापना दिवस पर नहीं आए हांगलू, रजिस्ट्रार का भी विरोध
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औपचारिकता तक सीमित रहा समारोह, काले वस्त्र पहनकर पहुंचे छात्र
अतिथियों के संबोधन पर बजीं तालियां, कुलपति के खिलाफ हुई नारेबाजी
अमर उजाला ब्यूरो
इलाहाबाद। इलाहाबाद विश्वविद्यालय का 132वां स्थापना दिवस समारोह औपचारिकता तक सीमित रह गया। समारोह में कुलपति प्रो. रतन लाल हांगलू शामिल नहीं हुए। उनकी जगह कार्यवाहक कुलपति प्रो. केएस मिश्र ने कार्यक्रम की अध्यक्षता की। काले वस्त्र पहन सांकेतिक विरोध दर्ज कराने पहुंचे छात्रों ने अतिथियों के संबोधित पर तो खूब तालियां बजाईं, लेकिन कुलपति और रजिस्ट्रार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।
इविवि के सीनेट हॉल में रविवार सुबह 11 बजे मुख्य अतिथि वरिष्ठ वैज्ञानिक प्रो. डीसी पांडेय, कार्यवाहक कुलपति प्रो. केएस मिश्र, रजिस्ट्रार एनके शुक्ला, पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष सतीश अग्रवाल एवं इविवि के शिक्षक प्रो. एए फातमी ने दीप जलाकर कार्यक्रम का उद्घाटन किया। इस दौरान वहां काले वस्त्र में पहुंचे पूर्व छात्रसंघ अध्यक्षा रोहित मिश्र एवं ऋचा सिंह, छात्र नेता आनंद सिंह निक्कू, रजनीश सिंह रिशू, विक्रांत सिंह समेत कई छात्र मंच के सामने जमीन पर बैठ गए। छात्रों के हाथ में तख्तियां थीं जिन पर लिखा था, ‘रघुपति राघव राजा राम, शिक्षकों को सम्मति दे भगवान।’ कुछ तख्तियों पर ऑटा और ऑक्टा को लेकर टिप्पणियां की गई थीं। कुलपति प्रो. हांगलू के खिलाफ भी तख्तियों पर टिप्पणियां लिखी गईं थी। छात्र समारोह के दौरान बीच-बीच में भजन गाते रहे तो कुलपति और रजिस्ट्रार प्रो. एनके शुक्ला के खिलाफ नारेबाजी भी करते रहे। हालांकि अतिथियों के संबोधन को सभी छात्रों ने शांतिपूर्वक सुना और खूब तालियां बजाईं।
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प्रो. डीसी पांडेय ने बताए मोबाइल के नुकसान
डीआरडीओ के वरिष्ठ वैज्ञानिक प्रो. डीसी पांडेय ने 38 साल पहले इविवि से ही पीएचडी की पढ़ाई पूरी की थी। उन्होंने छात्रों के साथ अपने अनुभव साझा किए और बताया कि जब विश्वविद्यालय में पढ़ा करते थे तो वह भी छात्रसंघ के चुनाव के दौरान प्रत्याशियों के जुलूस में नाचते-गाते शामिल होते थे। उन्होंने कहा कि कार्यक्रम में बैठे सभी लोगों के हाथों में मोबाइल है, सो वैज्ञानिक होने के नाते वह बताना चाहते हैं कि इसके इलेक्ट्रोल मैग्नेटिक रेडिएशन के कई नुकसान हैं। कहा कि इसकी अति मानव जीवन के लिए बेहद खतरनाक है। खासकर बच्चों को इससे दूर रखना चाहिए। उन्होंने छात्रों को प्रेरित करते हुए कहा कि जिस तरह यहां के बच्चों ने प्रशासनिक, इंजीनियरिंग सेवाओं में धाक जमाई, उसे बरकरार रखने की जरूरत है। उन्होंने बताया वह उत्तराखंड के रहने वाले हैं और जब उन्हें यहां में प्रवेश मिला था, उस वक्त दूसरे प्रदेशों के छात्रों का एक ही लक्ष्य होता था कि किसी तरह इविवि में प्रवेश मिल जाए।
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पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष ने वीसी पर साधा निशाना
- पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष सतीश अग्रवाल ने मौजूदा दौर में इविवि की हालत पर चिंता जताते हुए कुलपति पर निशाना साधा और शिक्षकों की राजनीति पर भी टिप्पणियां कीं। वर्ष 1966 में इविवि छात्रसंघ के अध्यक्ष रहे सतीश अग्रवाल ने कहा कि अब न तो 1966 जैसा माहौल है और न ही वैसे छात्र, शिक्षक और कुलपति हैं। कहा कि इविवि को आगे बढ़ाने के लिए सभी को एकजुट होकर प्रयास करना होगा।
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कार्यवाहक कुलपति ने छात्रों को आगे बढ़ने के लिए किया प्रेरित
इविवि के कार्यवाहक कुलपति प्रो. केएस मिश्र ने कहा कि एक वक्त था जब यूपीपीएससी और यूपीएसी की परीक्षाओं के इंटरव्यू में शामिल होने के लिए जब इविवि के छात्र जाते थे तो एक्सपर्ट का नजरिया बदल जाता था। एक्सपर्ट अपने सवाल पूछने के तरीके बदल देते थे। छात्रों से अपील की कि हमें मिलकर विश्वविद्यालय को वही पुराना गौरव वापस लाना है और यहां के छात्रों को हर क्षेत्र में आगे बढ़ना है। कहा कि उन्होंने भले ही इविवि में पढ़ाई नहीं की लेकिन यहां शिक्षक बनने का उन्हें गौरव मिला।
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लगे नारे, ‘हांगलू, शुक्ला भाई-भाई’
कार्यक्रम के अंत में रजिस्ट्रार प्रो. एनके शुक्ला अतिथियों को धन्यवाद ज्ञापित करने जैसे ही माइक के सामने पहुंचे, छात्रों ने नारेबाजी शुरू की दी। छात्र नारा लगाने लगे, ‘हांगलू, शुक्ला भाई-भाई’। इससे स्थिति असहज हो गई लेकिन रजिस्ट्रार ने छात्रों के शांत होने का इंतजार किया और इसके बाद वहां उपस्थित छात्रों समेत सभी को कार्यक्रम में शामिल होने के लिए धन्यवाद दिया।
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