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कॉपियां नहीं जांचीं तो नहीं बनेंगे आंतरिक परीक्षक

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मूल्यांकन में लापरवाही पर नहीं बनेंगे आंतरिक परीक्षक
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0 राज्य विवि ने सभी मूल्यांकन केंद्रों से तलब की रिपोर्ट
0 तीन वर्ष तक पढ़ा चुके शिक्षकों को ही मिलेगी जिम्मेदारी
अमर उजाला ब्यूरो
इलाहाबाद।
इलाहाबाद राज्य विश्वविद्यालय एवं संघटक स्व वित्तपोषित महाविद्यालयों में कॉपियों के मूल्यांकन में लापरवाही करने वाले शिक्षकों को प्रायोगिक/मौखिक परीक्षा में आंतरिक परीक्षक की जिम्मेदारी नहीं दी जाएगी। इस बाबत राज्य विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार डॉ. साहब लाल मौर्य ने आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए हैं और साथ ही सभी मूल्यांकन केंद्रों से मूल्यांकन कार्य के बारे में विस्तार से जानकारी मांगी है। इसी रिपोर्ट के आधार पर आंतरिक परीक्षकों की ड्यूटी निर्धारित की जाएगी।
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विश्वविद्यालय प्रशासन ने तय किया है कि प्रायोगिक/मौखिक परीक्षा में स्ववित्तपोषित महाविद्यालयों के उन्हीं शिक्षकों को आंतरिक परीक्षक बनाया जाएगा, जो लगातार तीन वर्ष या उससे अधिक समय से अध्यापन कार्य कर रहे हैं और उन्होंने संबंधित उत्तर पुस्तिकाओं को मूल्यांकन किया हो। विश्वविद्यालय प्रशासन को शिकायत मिली है कि इस श्रेणी के कुछ शिक्षकों की ओर से उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन में रुचि नहीं ली जा रही है, जिससे शासन की मंशा के अनुरूप उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन में अड़चन आ रही है। इसी के मद्देनजर विश्वविद्यालय प्रशासन ने निर्णय लिया है कि जिन शिक्षकों ने मूल्यांकन में सहयोग नहीं किया है, उन्हें सत्र 2017-18 की परीक्षाओं से संबंधित प्रायोगिक/मौखिक परीक्षा में आंतरिक परीक्षक नहीं बनाया जाएगा। इस बाबत विश्वविद्यालय प्रशासन ने सभी मूल्यांकन केंद्रों से रिपोर्ट मांगी है।
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