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पुलिसकर्मियों की अनिवार्य सेवानिवृत्ति पर रोक
0 हाईकोर्ट ने नियमानुसार काम नहीं करने पर मांगा जवाब
अमर उजाला ब्यूरो
इलाहाबाद।
पचास वर्ष की आयु पूरी कर चुके पुलिसकर्मियों को अनिवार्य सेवानिवृत्ति देने के आदेश पर हाईकोर्ट ने रोक लगा दी है। कोर्ट ने प्रदेश सरकार और पुलिस विभाग से इस बाबत जानकारी मांगी है कि किस प्रकार से नियमों को दरकिनार कर सेवानिवृत्ति दी जा रही है। अनिवार्य सेवानिवृत्ति पाए दर्जनों पुलिसकर्मियों की याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति आरएसआर मौर्या ने यह आदेश दिया। मामले की अगली सुनवाई नवंबर के तीसरे सप्ताह में होगी।
जगत बिहारी तिवारी, खुर्शीद अकबर सहित अन्य पुलिसकर्मियों की याचिकाओं पर अधिवक्ता विजय गौतम ने पक्ष रखा। अधिवक्ता का कहना था कि याचीगण को छह जुलाई 2017 के शासनादेश के तहत अनिवार्य सेवानिवृत्ति देने का आदेश 11 सितंबर 2017 को दिया गया। आदेश में कर्र्मचारियों को मिली प्रतिकूल प्रविष्टियों और उनके विरुद्ध हुई अनुशासनात्मक कार्रवाई का भी जिक्र था। कहा गया कि आदेश जारी करते समय अनिवार्य सेवानिवृत्ति देने के लिए तय मानकों और नियमों का पालन नहीं किया गया। स्क्रीनिंग कमेटी गठित किए बिना पिक एंड चूज पॉलिसी के तहत मनमाने तरीके से छंटनी कर आदेश जारी हुआ। कोर्ट का कहना था कि अनिवार्य सेवानिवृत्ति देने के आदेश में कोई धब्बा नहीं होना चाहिए। 11 सितंबर के आदेश पर रोक लगाते हुए सरकार से इस प्रकरण पर जानकारी मांगी है।
उल्लेखनीय है कि भाजपा सरकार ने सभी सरकारी विभागों में पचास वर्ष की आयु पूरी कर चुके ऐसे कर्मचारियों को अनिवार्य सेवानिवृत्ति देने का निर्णय लिया है, जिनका सर्विस रिकार्ड अच्छा नहीं है और जो उपयोगी सेवा अपने विभाग को नहीं दे पा रहे हैं। इसके लिए मुख्य सचिव ने छह जुलाई 2017 को शासनादेश जारी किया, जिसमें अनिवार्य सेवानिवृत्ति देने के नियम भी तय किए गए हैं। कई विभाग इन नियमों का पालन नहीं कर रहे हैं। इससे पूर्व जेल विभाग में भी मनमाने तरीके से अनिवार्य सेवानिवृत्ति देने का मामला हाईकोर्ट पहुंच चुका है।