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सहायक समन्वयक भर्ती की नए सिरे से जांच का आदेश

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सहायक समन्वयक भर्ती की सिरे से जांच का आदेश
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0 निलंबित डायट प्राचार्य ने याचिका दाखिल कर दी है चुनौती
अमर उजाला ब्यूरो
इलाहाबाद।
जिले में सहायक समन्वयक अधिकारियों की भर्ती में धांधली के मामले में हाईकोर्ट ने सचिव शिक्षा अनुभाग को नए सिरे से जांच करने और यदि जरूरी हो तो सभी संबंधित अधिकारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई करने का आदेश दिया है। प्रदेश सरकार को इस मामले में तीन सप्ताह में रिपोर्ट दाखिल करने का भी निर्देश है। डायट इलाहाबाद के सेवानिवृत्त प्राचार्य राजेंद्र प्रताप की याचिका पर न्यायमूर्ति पंकज मित्तल और न्यायमूर्ति इरशाद अली की पीठ सुनवाई कर रही है।
याची का कहना है कि सहायक समन्वयकों की भर्ती में धांधली के आरोप में उन्हें निलंबित कर दिया गया था। उन पर आरोप है कि उन्होंने भर्ती विज्ञापन में पांच वर्ष के अनुभव के बजाए आठ वर्ष का अनुभव दिखाया तथा लिखित परीक्षा का परिणाम जारी होने से पहले ही साक्षात्कार करा लिया गया। उत्तर पुस्तिकाओं पर अंक देने में भी धांधली की गई। याची का कहना था कि आठ मई 2017 के शासनादेश में अनुभव की अर्हता पांच वर्ष के बजाए आठ वर्ष दी गई है। विज्ञापन बेसिक शिक्षा अधिकारी ने जारी किया था न कि याची ने। इसी प्रकार से साक्षात्कार पहले आयोजित करने के पीछे समय बचाने का इरादा था। परीक्षा में बहुत कम अभ्यर्थी शामिल हुए थे, इसलिए साक्षात्कार में सभी आवेदकों को बुलाया गया था। लिखित परीक्षा का परिणाम एक कमेटी द्वारा जारी किया गया, जिसमें जिलाधिकारी, मुख्य विकास अधिकारी और बेसिक शिक्षा अधिकारी भी शामिल थे। इन सभी ने हस्ताक्षर किए हैं। इसलिए लिखित परीक्षा के परिणाम में गड़बड़ी करना अकेले याची के लिए संभव ही नहीं है।
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कोर्ट ने कहा कि याची के द्वारा दर्शाए गए तथ्यों से पता चलता है कि प्रथम दृष्टया इसमें अन्य अधिकारियों की भी मिलीभगत है। इसलिए सचिव शिक्षा अनुभाग-13 मामले को नए सिरे से देखें और आवश्यक हो तो अन्य अधिकारियों के खिलाफ भी विभागीय कार्रवाई प्रारंभ की जाए। याचिका पर 20 नवंबर को अगली सुनवाई होगी।
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