इस बार भी रिटायर्ड शिक्षकों से चलेगा काम
0 इलाहाबाद राज्य विश्वविद्यालय में चुनौती बना शिक्षण कार्य
0 शिक्षकों के 92 पद स्वीकृत, पर नियुक्ति पर निर्णय अटका
अमर उजाला ब्यूरो
इलाहाबाद।
इलाहाबाद राज्य विश्वविद्यालय में नियमित शिक्षकों की नियुक्तियों पर अब तक कोई फैसला न होने के कारण इस बार भी रिटायर्ड शिक्षकों से काम चलाया जाएगा। हालांकि, विवि प्रशासन ने नियमित शिक्षकों की नियुक्ति के लिए शासन को प्रस्ताव भेज रखा है। इसके साथ ही नियमित कर्मचारियों की नियुक्ति को भी शासन से अब तक हरी झंडी नहीं मिली है।
राज्य विवि में कला एवं कॉमर्स संकाय के तहत विभिन्न विषयों के लिए प्रोफेसर के 23, एसोसिएट प्रोफेसर के 23 और असिस्टेंट प्रोफेसर के 45 यानी कुल 92 शैक्षणिक और विभिन्न श्रेणी के 108 शिक्षणेत्तर पदों का सृजन किया जा चुका है। शैक्षिक और शिक्षणेत्तर पदों पर की नियमित नियुक्ति के लिए प्रस्ताव सपा सरकार के कार्यकाल में ही शासन को भेजा गया था। प्रदेश में सत्ता परिवर्तन के बाद शासन को पुन: यह प्रस्ताव भेजा गया। पिछले दिनों राज्य विवि के एक कार्यक्रम में शामिल होने आए उच्च शिक्षा मंत्री डॉ. दिनेश शर्मा ने भी आश्वस्त किया था कि जल्द ही नियमित नियुक्तियों पर निर्णय लिया जाएगा, लेकिन प्रस्ताव अब तक शासन स्तर पर ही अटका हुआ है। मौजूदा व्यवस्था में राज्य विवि में कुल दस शिक्षक हैं और सभी दूसरे विश्वविद्यालयों से रिटायर हो चुके हैं।
नियमों के अनुसार 65 से 70 वर्ष तक की आयु वाले रिटायर शिक्षकों से ही राज्य विवि में शिक्षण कार्य लिया जा सकता है। इस बार दो शिक्षकों की आयु 70 वर्ष से अधिक हो गई है। उनकी जगह अब दूसरे रिटायर शिक्षकों को रखा जाना है। राज्य विवि में स्वीकृत 92 पदों के मुकाबले महज 10 रिटायर्ड शिक्षकों के माध्यम से 2017-18 में शिक्षण कार्य लेना विवि प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती है। हालांकि राज्य विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. राजेंद्र प्रसाद का कहना है कि नियमित शिक्षकों की नियुक्ति की प्रक्रिया तेजी से आगे बढ़ी है। सत्र 2017-18 में ही यह प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी। इसके साथ ही नियमित शिक्षेणेत्तर कर्मचारियों की नियुक्ति के प्रस्ताव पर भी काम तेजी से आगे बढ़ा है।