लॉकडाउन में बिजली कंपनियों को बड़ी चपत लगी है। महीने भर से वसूली ठप है। बकायेदारों के खिलाफ अभियान भी स्थगित कर दिया गया है। इससे जहां महकमे के माथे पर बल पड़ गए हैं, वहीं बड़े पैमाने पर चोरियां बढ़ गई हैं। डिस्काम में प्रयागराज समेत आसपास के जिलों में महीने में भर ही छह सौ करोड़ से अधिक का झटका लगा है। एन साफ्ट, प्राइम -वन जैसी नामी कंपनियों के काम ठप हैं। बावजूद इसके उनको हजारों कर्मचारियों को मानदेय का भुगतान करना पड़ रहा है।
जिले के 20 डिवीजनों में लॉकडाउन की अवधि में बिलिंग न के बराबर हुई है। जो लोग ऑनलाइन पेमेंट करते थे, उन्होंने भी इस दौरान भुगतान नहीं किया है। इससे पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम व इससे जुड़ी बिजली कंपनियों की स्थिति डंवाडोल हो गई है। यूपीपीसीएल से करार पर बिलिंग व उपकेंद्रों के अनुरक्षण का काम करने वाले निजी क्षेत्र की कंपनियों पर कामगारों को मानदेय का भुगतान हर हाल में करने का दबाव है। ऐसे में भुगतान न होने से मुश्किलें बढ़ गई हैं। ऐसे में अफसरों की ओर से लगातार मंथन किया जा रहा है और कुछ साइटों को खोलकर काम शुरू कराने की तैयारी की जा रही है। कर्मचारियों के पास बनवाए जा रहे हैं, ताकि बिलिंग शुरू हो और फंसे हुए करोड़ों रुपये किसी तरह से बाहर निकाले जा सकें। सबसे बड़ा संकट है कि लॉकडाउन की अवधि में फील्ड में अफसरों का दबाव नहीं रह गया है। विभाग के एक अफसर ने बताया कि वसूली के लिए किसी पर दबाव न बनाने के लिए कहा गया है। साथ ही 30 जून तक किसी के कनेक्शन काटने पर भी रोक लगा दी गई है। ऐसे में भुगतान की बजाए कुछ इलाकों में चोरियां भी बढ़ गई हैं। इससे बड़ा नुकसान हुआ है। मुख्य अभियंता ओपी यादव ने स्वीकार किया कि लॉकडाउन की अवधि में छह सौ करोड़ रुपये से अधिक का झटका लगा है। लॉकडाउन खुलने के बाद भी इसकी भरपाई में वक्त लग लगेगा।
बिजली चोरी बढ़ी, अफसरों के माथे पर बल
लॉकडाउन में कारखाने, लघु-कुटीर उद्योग और बिजली आधारित अन्य काम पूरी तरह ठप होने के बाद भी फीडरों पर लोड दो गुना से अधिक बढ़ गया है। करेलाबाग, करेली, रामबाग व कल्याणी देवी इलाकों में ताबड़तोड़ ट्रांसफार्मर जलने और लाइन ट्रिप होने की सबसे बड़ी वजह बिजली चोरी बताई जा रही है। कहा जा रहा है कि कटियामारों के खिलाफ अभियान ठप होने का फायदा उठाकर लोग अब केबल क्रास और मीटर बाईपास कर धड़ल्ले से फ्रिज, एसी, कूलर वाशिंग मशीनें चला रहे हैं। यही हाल रहा तो अगले दो महीने में बिजली विभाग का भट्ठा बैठ जाएगा।