लॉकडाउन में यूपी बोर्ड की कापियों के मूल्यांकन गति पकड़ने लगा है। बुधवार को अधिकांश मूल्यांकन केंद्रों पर पहले दिन की अपेक्षा अधिक शिक्षक पहुंचे। प्रशासन का दावा है कि जिले के दस केंद्रों पर दूसरे दिन 79 फीसदी शिक्षकों की उपस्थिति रही और 5864 कॉपियां जांचीं गईं।
जिला विद्यालय निरीक्षक आरएन विश्वकर्मा की ओर से जारी आंकड़े के अनुसार अब तक 20.28 फीसदी कॉपियां जांची जा चुकी हैं। जिले के सभी मूल्यांकन केंद्रों पर भारत स्काउट गाइड इंटर कॉलेज में 270 में से 218, जीजीआईसी में 200 में से 149, डॉ. केएन काटजू इंटर कॉलेज में 300 में से 254, जगत तारन गर्ल्स इंटर कॉलेज में 300 में से 226, केसर विद्यापीठ में 200 में से 166, अग्रसेन इंटर कॉलेज में 150 में से 105, केपी इंटर कॉलेज में 180 में से 139, जीआईसी में 300 में से 242, जमुना क्रिश्चियन कॉलेज में 100 में से 72, क्रास्थवेट गर्ल्स इंटर कॉलेज में 175 में से 146 परीक्षकों ने मूल्यांकन किया। मूल्यांकन के दौरान जिला विद्यालय निरीक्षक केंद्रों का निरीक्षण किया। बताया कि परीक्षक सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए मूल्यांकन कर रहे हैं।
बिजली चले जाने पर मूल्यांकन नहीं किया
जीजीआईसी में मूल्यांकन के दौरान बिजली चले जाने पर शिक्षक मूल्यांकन का बहिष्कार करते हुए बाहर आ गए। आरोप लगाया कि केंद्र पर जनरेटर की व्यवस्था नहीं की गई है। प्रधानाचार्या डॉ. इंदु सिंह ने बताया कि उनकी ओर से सभी व्यवस्था है, जब विद्यालय में जनरेटर नहीं है तो आखिर में बिजली चली जाने के बाद वह क्या कर सकती हैं।
सैनिटाइजर, मास्क की पर्याप्त व्यवस्था नहीं
शहर के मूल्यांकन केंद्रों पर सैनिटाइजर, मास्क, हैंडवाश आदि की पर्याप्त व्यवस्था नहीं की गई है। माध्यमिक शिक्षक संघ के प्रदेश महामंत्री लालमणि द्विवेदी ने कहा कि स्कूल वालों पर दबाव बनाकर व्यवस्थाएं करने को कहा जा रहा है।
अल्लापुर से जमुना क्रिश्चियन तक आठ सौ किराया
मूल्यांकन कार्य में लगी महिला शिक्षिकाओं को शहर में भी मूल्यांकन केंद्र पहुंचने के लिए वाहन नहीं मिल रहे। पहले दिन घर अल्लापुर से मूल्यांकन के लिए जमुना क्रिश्चियन इंटर कॉलेज के लिए निकलीं एक शिक्षिका को केंद्र तक पहुंचने के लिए 800 रुपये किराये का भुगतान करना पड़ा। हालत यह रही कि मूल्यांकन के लिए पहुंचने पर पता चला कि उनके डीएचई भी साधन नहीं मिलने केंद्र पर नहीं पहुंचे हैं, वह बिना मूल्यांकन किए ही घर लौट आईं। केपी इंटर कॉलेज में करेली की रहने वालीं एक शिक्षिका को मूल्यांकन में डीएचई की जिम्मेदारी दी गई है, वह पहले दिन साधन नहीं मिलने से समय से मूल्यांकन केंद्र नहीं पहुंच सकीं।