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फूलपुर से चुनाव हारने वाले बन गए बड़े नेता

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फूलपुर लोकसभा जहां चुनाव हारकर बन गए बड़े नेता
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0 राम मनोहर लोहिया, कांशीराम, सोनेलाल पटेल सरीखे नेता यहां चुनावी मैदान में सफल नहीं हो सके
डॉ. अखिलेश मिश्र
प्रयागराज। पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू की सीट के रूप में चर्चित इलाहाबाद जिले की फूलपुर लोकसभा सीट अपने आरंभिक दौर में जहां कांग्रेस का गठ रही तो मंडल आंदोलन के बाद यह सीट दो बार जनता दल, चार बार समाजवादी पार्टी और एक-एक बार बीएसपी-बीजेपी के कब्जे में रही। पूर्व प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू लगातार तीन बार 1952, 1957 एवं 1962 में यहां से सांसद चुने गए। फूलपुर संसदीय सीट दो पूर्व प्रधान मंत्रियों जवाहर लाल नेहरू और वीपी सिंह का चुनाव क्षेत्र होने के साथ इस मायने में खास रही है कि यहां से चुनाव हारने वाले भी देश के बड़े नेता बनकर उभरे।
फूलपुर से लोकसभा चुनाव हारने वाले प्रमुख नेताओं में 1962 के चुनाव में डॉ. राम मनोहर लोहिया, 1967 में जनेश्वर मिश्र, 1969 उपचुनाव में नेहरू जी के करीबी रहे केशव देव मालवीय, बहुजन समाजपार्टी के संस्थापक कांशीराम सहित अपना दल के सोनेलाल पटेल, रामपूजन पटेल का नाम शामिल है। 1962 के चुनाव में सबसे खास बात यह है कि पंडित जवाहर लाल नेहरू ने डॉ. राम मनोहर लोहिया को पराजित किया, जो बाद में पंडित नेहरू की मदद से राज्यसभा में पहुंचे। फूलपुर लोकसभा सीट से पंडित जवाहर लाल नेहरू के बाद अपने पहले चुनाव में हार का मुंह देखने वाले राम पूजन पटेल लगातार तीन बार सांसद चुने जाने वाले पहले नेता हैं।
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फूलपुर संसदीय सीट ऐसी है जहां जनसंघ एवं भाजपा के नाम सफलता बहुत सीमित है। राम मंदिर आंदोलन के बाद 1996 में हुए चुनाव में इलाहाबाद एवं चायल सीट पर भगवा ध्वज फहरा लेकिन फूलपुर में 1996 में भाजपा दूसरे स्थान पर भी नहीं आ सकी। 2014 के चुनाव में मोदी लहर में भाजपा के केशव प्रसाद मौर्य इस सीट से विजयश्री पाने में सफल तो रहे परंतु 2017 में प्रदेश में भाजपा की सरकार बनने के बाद उनके उप मुख्यमंत्री बन जाने के बाद, उन्होंने फूलपुर सीट से इस्तीफा दे दिया। 2018 में उपचुनाव में समाजवादी पार्टी के नागेंद्र प्रताप सिंह पटेल ने भाजपा के कौशलेंद्र पटेल को हराकर तीन वर्ष बाद ही यह सीट छीन ली।
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फूलपुर में लगातार तीन चुनाव 1952, 1957 एवं 1962 में नेहरू जी की विजय और 1964 में उनके निधन के बाद हुए उपचुनाव में उनकी बहन विजयलक्ष्मी पंडित ने एस जैसवार को हराकर विजयी रहीं जबकि 1967 के चुनाव में विजय लक्ष्मी पंडित ने जनेश्वर मिश्र को हराया। विजय लक्ष्मी पंडित के संयुक्त राष्ट्रसंघ में चले जाने और उनके इस्तीफा देने के बाद जनेश्वर मिश्र ने नेहरू जी के खास रहे केशव देव मालवीय को हराकर चुनावी जीत की शुरूआत की। 1971 में पूर्व प्रधानमंत्री वीपी सिंह फूलपुर से प्रो. बीडी सिंह को पराजित कर पहली बार संसद पहुंचे। इंमरजेंसी के बाद हुए चुनाव में भारतीय लोकदल की कमला बहुगुणा ने कांग्रेस के राम पूजन पटेल को पराजित कर संसद में पहुंची। रामपूजन पटेल इसके बाद 1984, 1989 एवं 1991 में हुए तीन लोकसभा चुनाव में लगातार चुनाव जीतकर नेहरू जी के रिकार्ड की बराबरी की।
फूलपुर से विजयी सांसद
वर्ष विजेता उपविजेता
0 1952 -- जवाहर लाल नेहरू -- बंसीलाल
0 1951 जवाहर लाल नेहरू -- चेतराम
0 1962 जवाहर लाल नेहरू -- राम मनोहर लोहिया
0 1964 विजय लक्ष्मी पंडित-- एस. जायसवार
0 1967 विजय लक्ष्मी पंडित -- जनेश्वर मिश्र
0 1969 जनेश्वर मिश्र केडी मालवीय
0 1971 वीपी सिंह बीडी सिंह
0 1977 कमला बहुगुणा राम पूजन पटेल
0 1980 बीडी सिंह कमला बहुगुणा
0 1984 राम पूजन पटेल रहमान अली
0 1989 राम पूजन पटेल चंद्रजीत यादव
0 1991 राम पूजन पटेल बेनी माधव बिंद
0 1996 जंग बहादुर पटेल कांशीराम
0 1998 जंग बहादुर पटेल बेनी माधव बिंद
0 1999 धर्मराज पटेल बेनी माधव बिंद
0 2004 अतीक अहमद केशरी देवी
0 2009 कपिल मुनि करवरिया श्यामा चरण गुप्ता
0 2014 केशव प्रसाद मौर्य धर्मराज पटेल
0 2018 नागेंद्र प्रताप सिंह पटेल कौशलेंद्र पटेल
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