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75 फीसदी से अधिक अंक दिए तो अजग से जमा होगी कॉपी

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75 फीसदी से अधिक अंक मिले तो होगी जांच
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0 एएसयू और संघटक कॉलेजों में मौखिक एवं प्रायोगिक परीक्षा के लिए निर्देश जारी
0 विद्यार्थियों की कॉपी अलग से होगी जमा, लाभ पहुंचाने की शिकायतों पर हुई सख्ती
अमर उजाला ब्यूरो
प्रयागराज। इलाहाबाद राज्य विश्वविद्यालय (एएसयू) और संघटक महाविद्यालयों में मौखिक एवं प्रायोगिक परीक्षा में 75 फीसदी से अधिक अंक पाने वाले विद्यार्थी जांच के दायरे में होंगे। एएसयू प्रशासन को शिकायत मिली है कि कॉलेजों में अभ्यर्थियों को अधिक अंक देकर लाभ पहुंचाया जाता है। इसी के मद्देनजर एएसयू प्रशासन ने निर्देश जारी किए हैं कि किसी अभ्यर्थी को 75 फीसदी से अधिक अंक दिए जाते हैं तो उसकी कॉपी अलग से जमा की जाएगी और जांच होगी कि अभ्यर्थी 75 फीसदी से अधिक अंक पाने के योग्य है या नहीं।
राज्य विश्वविद्यालय की परीक्षा नियंत्रक डॉ. विनीता यादव ने संघटक कॉलेजों को निर्देश दिए हैं कि समस्त परास्नातक एवं व्यावसायिक पाठ्यक्रमों की सत्र 2018-119 के प्रथम सेमेस्टर, सत्र 2017-18 की तृतीय सेमेस्टर और सत्र 2016-16 की पांचवें सेमेस्टर की मौखिक/प्रायोगिक परीक्षा कराकर कॉलेज प्राप्तांकों को ऑनलाइन राज्य विश्वविद्यालय को उपलब्ध कराएंगे। अभ्यर्थियों के प्राप्तांकों की दो प्रतियां तैयार की जाएंगी, जिस पर प्राचार्य एवं अन्य परीक्षकों के हस्ताक्षर होंगे। एक प्रति सील बंद लिफाफे में परीक्षा नियंत्रक और दूसरी प्रति सील बंद लिफाफे में प्राचार्य को उपलब्ध कराई जाएगी। मौखिक/प्रायोगिक परीक्षाओं की उत्तर पुस्तिकाएं महाविद्यालय में सील कराकर सुरक्षित रखी जाएंगी।
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यह निर्देश भी दिए हैं कि मौखिक/प्रायोगिक परीक्षा में परीक्षार्थी को अधिकतम 75 फीसदी अंक दिए जाएं। अगर कॉलेज को लगता है कि अभ्यर्थी इससे अधिक अंक पाने के लिए उपयुक्त एवं योग्य है तो उसकी परीक्षा की कॉपियां सीधे विश्वविद्यालय में अलग से जमा की जाएंगी। इसके साथ ही कॉलेजों से अपेक्षा की गई है कि परीक्षक की नियुक्ति पूरी तरह से गोपनीय रखी जाए। परीक्षा नियंत्रक डॉ. विनीता यादव के अनुसार अक्सर शिकायतें आती हैं कि कॉलेजों में मौखिक/प्रोयोगिक परीक्षा की आड़ में अधिक अंक देकर अतिरिक्त लाभ पहुंचाया गया। ऐसी शिकायतों के मद्देनजर ही व्यवस्था की गई है कि जिन अभ्यर्थी को 75 फीसदी से अधिक अंक दिए जाते हैं, उनकी कॉपियां अलग से विश्वविद्यालय में जमा होंगी।
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जरूरत पड़ी तो दोबारा हो सकती है मौखिक परीक्षा
- जिन परीक्षार्थियों को मौखिक या प्रायोगिक परीक्षा में 75 फीसदी से अधिक अंक दिए जाएंगे, उनकी कॉपियां विश्वविद्यालय में अलग से जमा की जाएंगी। कॉपियों की जांच के बाद जरूरत पड़ती है तो ऐसे परीक्षार्थियों को सीधे विश्वविद्यालय में बुलाकर फिर से उनकी मौखिक या प्रायोगिक परीक्षा ली जा सकती है।
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