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नोएडा भूमि घोटाले के आरोपी पंकज की जमानत नामंजूर

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नोएडा भूमि घोटाले के आरोपी पंकज की जमानत नामंजूर
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यादव सिंह केस में आरोपी है पंकज जैन

अमर उजाला ब्यूरो
इलाहाबाद।
हाईकोर्ट ने नोएडा के चीफ इंजीनियर रहे यादव सिंह के साथ मिलकर करोड़ों रुपये का भूमि घोटाला करने के आरोपी पंकज जैन की जमानत अर्जी नामंजूर कर दी है। पंकज मेसर्स जेएसपी प्रोजेक्ट प्राइवेट कंपनी का पूर्व निदेशक भी है। उसने सीबीआई कोर्ट गाजियाबाद में आत्मसमर्पण किया था। कोर्ट ने उसे न्यायिक अभिरक्षा में लेकर जेल भेज दिया। इसे हाईकोर्ट में चुनौती दी गई थी। कोर्ट ने कहा कि सीबीआई कोर्ट द्वारा अभियुक्त को न्यायिक अभिरक्षा में लेने के निर्णय में कोई अवैधानिकता नहीं है।
याची का कहना था कि आत्मसमर्पण करने के बाद अदालत को उससे बांड भरवाकर छोड़ने का आदेश देना चाहिए था। पंकज जैन की याचिका पर न्यायमूर्ति रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति वीके सिंह ने सुनवाई की। याचिका में सीआरपीसी की धारा 88 की वैधानिकता को चुनौती दी गई थी। याची का पक्ष वरिष्ठ अधिवक्ता विक्रम चौधरी ने रखा। याची का कहना था कि धारा 88 अतार्किक और असंवैधानिक है। याची को समर्पण करने पर व्यक्तिगत बांड पर छोड़ने का आदेश देने के बजाए सीबीआई कोर्ट ने उसे न्यायिक अभिरक्षा में लिया। ऐसा करके सीबीआई कोर्ट ने गलती की है।
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पंकज जैन के खिलाफ सीबीआई ने आरोपपत्र दाखिल किया है जिसे उसने हाईकोर्ट से लेकर सुप्रीमकोर्ट तक में चुनौती दी थी मगर कहीं भी राहत नहीं मिली। सीबीआई कोर्ट ने उसके विरुद्ध गैर जमानती वारंट जारी किया। उसे हाईकोर्ट में चुनौती दी गई। याची ने हाईकोर्ट में आश्वासन दिया कि वह दो सप्ताह के भीतर सीबीआई कोर्ट में समर्पण कर जमानत के लिए प्रार्थनापत्र देगा। मगर उसने ऐसा भी नहीं किया और सुप्रीमकोर्ट में फिर से याचिका दाखिल कर दी। सुप्रीमकोर्ट से निराशा हाथ लगने के बाद उसने सीबीआई कोर्ट में समर्पण कर बांड भरने की अर्जी दी। सीबीआई कोर्ट ने उसकी अर्जी खारिज कर अभिरक्षा में लेने का आदेश दिया। इस आदेश को भी हाईकोर्ट में चुनौती दी गई।
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सीबीआई के अधिवक्ता ने याचिका का विरोध करते हुए कहा कि आरोपी पर धोखाधड़ी कर सरकार को करोड़ों रुपये का नुकसान पहुंचाने का आरोप है। उसने अदालत के आदेशों का भी अमल नहीं किया। हाईकोर्ट ने याचिका अस्वीकार कर दी है।
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