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अस्थायी डाक कर्मियों को स्थायी के समान मिलेगा लाभ
0 डाक विभाग के अस्थायी ग्रुप डी कर्मियों के मामले में केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण का आदेश
अमर उजाला ब्यूरो
इलाहाबाद। डाक विभाग में ग्रुप डी के पदों पर कार्यरत अस्थायी कर्मचारियों को बड़ी राहत देते हुए केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण (कैट) ने उनको नियमित ग्रुप डी कर्मचारियों के समान ही जीपीएफ कटौती और अन्य लाभ देने का निर्देश दिया है। मेरठ और बागपत जिलों में तैनात रोहिताश, जगेश्वर, रामनरेश, सत्यपाल आदि ने कैट में याचिका दाखिल कर जीपीएफ कटौती बंद करने संबंधी आदेश को चुनौती दी थी। उनकी याचिका पर कैट के न्यायिक सदस्य डा. मुर्तजा अली ने सुनवाई की।
याचीगण का कहना था कि वह डाक विभाग में चौकीदार के पद पर एक जनवरी 1984 से 25 जनवरी 1989 को नियुक्त हुए थे। इसके बाद उनको अस्थायी पदों पर प्रोन्नत कर दिया गया तथा ग्रुप डी के स्थायी कर्मियों के समान सभी वेतन और भत्ते मिलने लगे। 12 अप्रैल 1991 को महानिदेशक डाक ने भी पोस्टमास्टर जनरलों को पत्र जारी कर उन सभी कर्मचारियों को अस्थायी कर्मी का दर्जा देने का निर्देश दिया जो 240 दिन की सेवा पूरी कर चुके हैं। तीन साल की सेवा देने के बाद उनकी जीपीएफ कटौती भी शुरू कर दी गई जो 2004 तक जारी रही।
2004 में सभी अस्थायी ग्रुप डी कर्मियों को विभाग ने सूचित किया कि सभी अस्थायी कर्मियों को जीपीएफ की काटी गई धनराशि वापस कर दी जाएगी और वह पुरानी पेंशन योजना के हकदार नहीं होंगे। याचीगण का कहना था कि नियमानुसार वह नियमित ग्रुप डी कर्मचारियोें के समान सभी लाभ पाने के हकदार हैं। डाक विभाग का कहना था कि याचीगण ग्रुप डी के नियमित कर्मचारियों के समान वेतन और डीए पाने के हकदार हैं मगर वह पेंशन, चिकित्सा सुविधा और ग्रेच्युटी पाने के हकदार नहीं है।
न्यायिक सदस्य ने इस संबंध में उपलब्ध प्रावधानों और सुप्रीमकोर्ट द्वारा छेदी लाल और श्यामलाल शुक्ला आदि केसों में दिए निर्णयों का अवलोकन करने के बाद कहा कि याचीगण नियमित ग्रुप डी कर्मचारियों के समान भी मानें जाएंगे और उन्हीं के समान उनको सभी लाभों का भुगतान तीन माह के भीतर किया जाए।