बार कौंसिल के पूर्व सचिव की याचिका खारिज
0 निलंबन आदेश को हाईकोर्ट में दी थी चुनौती
अमर उजाला ब्यूरो
इलाहाबाद। यूपी बार कौंसिल के निलंबित सचिव डा. रामजीत सिंह यादव को हाईकोर्ट से झटका लगा है। निलंबन आदेश को चुनौती देने वाली उनकी याचिका कोर्ट ने खारिज कर दी है। कोर्ट ने सचिव के खिलाफ 29 जुलाई 2017 के बार कौंसिल के प्रस्ताव में कोई अवैधानिकता नहीं पाई है। रामजीत की याचिका पर न्यायमूर्ति पंकज मित्तल और न्यायमूर्ति इरशाद अली की खंडपीठ ने सुनवाई की।
बार कौंसिल ऑफ उत्तर प्रदेश ने 29 जुलाई 2017 की कौंसिल की बैठक में सचिव के खिलाफ विभागीय जांच गठित करने और उनको निलंबित करने का प्रस्ताव पारित किया था। कोर्ट ने कहा कि 29 जुलाई 2017 की बैठक में 23 सदस्यों ने शिरकत की थी और कोर्ट के आदेश पर उन सभी ने उस बैठक व उसकी कार्रवाई के संबंध में हलफनामा प्रस्तुत किया है। 23 में से इमरान माबूद खां, अजय यादव, हरिशंकर सिंह, अरुण कुमार त्रिपाठी और मधूलिका यादव ने अपने शपथपत्र में सचिव से जुड़े प्रस्ताव के पारित नहीं होने की बात कही, जबकि 18 अन्य सदस्यों ने बैठक में डॉ. रामजीत सिंह के विरुद्ध निलंबन व आरोपों की जांच का प्रस्ताव पारित होने की पुष्टि की।
उल्लेखनीय है कि बार कौंसिल की 29 जुलाई की बैठक में तत्कालीन सचिव डा. रामजीत सिंह यादव के विरुद्ध विभिन्न आर्थिक व अन्य अनियमितताओं के कारण उन्हें निलंबित करने और आरोपों की जांच कराने की अनुशंसा की गई थी। इसी बीच डॉ. रामजीत सिंह पर तत्कालीन अध्यक्ष के सहयोग से लाखों रुपये की आर्थिक अनियमितताएं करने और अध्यक्ष के अनुचित आदेशों का अनुपालन करने का आरोप है। यह भी आरोप है कि उन्होंने सदन की बैठक नहीं होने दी और कौंसिल के पदाधिकारियों के जुलाई में होने वाले चुनाव को रद्द करने में सहयोग किया। इन्हीं घटनाक्रमों के मद्देनजर कौंसिल ने पांचूराम मौर्य की अध्यक्षता में 29 जुलाई की बैठक में डॉ. रामजीत सिंह यादव के तत्काल निलंबन और रिटायर न्यायिक अधिकारी रामचंद्र मिश्र को सचिव नियुक्त करने तथा डॉ. रामजीत के विरुद्ध आरोपों की जांच रिटायर जस्टिस एपी सिंह ने कराने का निर्णय लिया था।