योगी सरकार में डीएचएफएल को दिए गए पीएफ के 41 अरब
संयुक्त संघर्ष समिति ने मुख्य अभियंता दफ्तर पर प्रदर्शन के बाद सभा में किया खुलासा, चेयरमैन की गिरफ्तारी के लिए बनाया दबाव
प्रयागराज। पीएफ घोटाले को लेकर विद्युत कर्मचारी संघ के नेताओं ने बृहस्पतिवार को नया खुलासा किया। मुख्य अभियंता दफ्तर पर प्रदर्शन के बाद समिति के पदाधिकारियों ने सभा में बताया कि बिजली अधिकारियों, कर्मचारियों के खून पसीने की कमाई का 65 फीसदी हिस्सा 4122 करोड़ रुपये मौजूदा योगी आदित्यनाथ की सरकार में डीएचएफएल कंपनी को दिए गए हैं। इसके लिए सीधे तौर पर यूपीपीसीएल के चेयरमैन आलोक कुमार को जिम्मेदार ठहराते हुए उनको तत्काल गिरफ्तार करने और पीएफ की रकम की वापसी की गारंटी देने की सरकार से मांग की गई।
एंग्लो बंगाली इंटर कॉलेज के सामने सीई दफ्तर पर हुए प्रदर्शन के बाद संघर्ष समिति के संयोजक अविनाश पटेल, अधीक्षण अभियंता आरके सिंह, आनंद पांडेय, राकेश कुमार, जयशंकर राय, राम सनेही यादव, विजय प्रताप तिवारी, रमेश यादव, रत्नेश जायसवाल, जवाहर लाल विश्वकर्मा, डीपी ओझा, रामसागर, प्रदीप गुप्ता, अतुल गौतम, नितिन बरनवाल, शिवम रंजन, राकेश वर्मा का कहना था कि सूबे में योगी सरकार के आने के बाद 41 अरब रुपये डीएचएफएल कंपनी के खाते में जमा करने का तारीखवार विवरण सामने आ चुका है। संघर्ष समिति के नेताओं ने कहा कि इस महाघोटाले को छिपाने के लिए ट्रस्ट की हर तीन महीने पर होने वाली बैठक भी नहीं की जा रही थी। इस घोटाले के विरोध में 18 19 नवंबर को प्रदेश व्यापी कार्य बहिष्कार भी एलान किया गया।
पीएफ घोटाले के विरोध में कांग्रेस का प्रदर्शन, ऊर्जा मंत्री से इस्तीफे की मांग
प्रयागराज। विद्युत विभाग कर्मचारियों के पीएफ की धनराशि का घोटाला करने वाले अफसरों पर कड़ी कार्रवाई करने की मांग को लेकर बृहस्पतिवार को कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन किया। नेताओं ने कहा कि इस घोटाले पर कांग्रेस पार्टी मौन रहने वाली नहीं है। जिला अल्पसंख्यक कांग्रेस के अध्यक्ष अरशद अली के नेतृत्व में करेली सब स्टेशन के सामने प्रदेश सरकार की जन विरोधियों के खिलाफ प्रदर्शन किया गया। ऊर्जा मंत्री से इस्तीफे की मांग की गई।