चंडीगढ़ कोर्ट, हाईकोर्ट, अदालत, न्यायालय
- फोटो : file photo
पुलिस और पीएससी में 40610 सिपाहियों की भर्ती के मामले में नया पेच फंस गया है। सुप्रीमकोर्ट के निर्देश पर व्हाइटनर लगाने वाले अभ्यर्थियों की अलग मेरिट बनाने से पूरी चयन प्रक्रिया गड़बड़ा गई है। नई मेरिट लिस्ट से 1819 चयनित अभ्यर्थी सूची से बाहर हो गए हैं। इनका दावा है कि अधिक अंक होने के कारण उनको चयन सूची से बाहर कर दिया गया। ऐसा सुप्रीमकोर्ट के आदेश को गलत तरीके से लागू करने के कारण हुआ है। फिलहाल अभ्यर्थी इस मामले को लेकर एक बार फिर हाईकोर्ट पहुंच गए हैं। विजय नाथ और अन्य की याचिका पर जस्टिस पीकेएस बघेल ने पुलिस भर्ती बोर्ड और प्रदेश सरकार से जानकारी तलब कर ली है।
याचिका दाखिल करने वाले अधिवक्ता सीमांत सिंह के मुताबिक 40610 पदों पर भर्ती के लिए आयोजित परीक्षा का अंतिम परिणाम सात जुलाई 2015 को जारी किया गया। चयन सूची को हाईकोर्ट में इस आधार पर चुनौती दी गई कि 6254 अभ्यर्थियों ने ओएमआर सीट में व्हाइटनर का प्रयोग किया था जबकि ऐसा करने की मनाही थी। हाईकोर्ट के आदेश से व्हाइटनर इस्तेमाल करने वालों को चयन सूची से बाहर कर नई मेरिट लिस्ट बनाई गई। इधर बाहर किए गए अभ्यर्थियों ने सुप्रीमकोर्ट में विशेष अनुमति याचिका दाखिल कर दी। सुप्रीमकोर्ट ने अपवाद स्वरूप और मात्र एक बार मौका देते हुए व्हाइटनर इस्तेमाल करने वालों को भी मेरिट लिस्ट में शामिल कर नई मेरिट बनाने का निर्देश दिया।
सुप्रीमकोर्ट के निर्देश के परिपेक्ष्य में पुलिस भर्ती बोर्ड ने व्हाइटनर वालों की अलग मेरिट बना दी। इससे 1819 अभ्यर्थी मेरिट लिस्ट से बाहर हो गए। याचिका में कहा गया है कि सुप्रीमकोर्ट ने 40610 पदों के सापेक्ष व्हाइटनर लगाने वालों को भी शामिल करते हुए मेरिट बनाने का निर्देश दिया था मगर इसका पालन नहीं किया गया और अलग मेरिट बना दी जबकि बाहर हुए अभ्यर्थियों में तमाम ऐसे लोग शामिल हैं जिनके अंक व्हाइटनर लगाने वालों से अधिक हैं। हाईकोर्ट ने प्रदेश सरकार से 12 जुलाई तक इस मामले में जानकारी मांगी है।