उत्तर प्रदेश में खुली जेलों के विस्तार की दिशा में सरकार ने कदम बढ़ाया है। इलाहाबाद हाईकोर्ट में दाखिल अनुपालन हलफनामे के मुताबिक प्रदेश में तीन नई खुली सुधार संस्थाओं (ओपन करेक्शनल इंस्टीट्यूशन) की स्थापना के लिए 4.59 करोड़ रुपये की धनराशि मंजूर कर दी गई है। हालांकि, बजट स्वीकृत होने के बावजूद इन संस्थाओं के निर्माण और पात्र बंदियों के चयन की समयसीमा अभी तय नहीं हो सकी है। इस पर हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से स्पष्ट कार्ययोजना मांगी है।
यह आदेश न्यायमूर्ति सौमित्र दयाल सिंह और न्यायमूर्ति स्वरूपमा चतुर्वेदी की खंडपीठ ने खुली सुधार संस्थाओं की स्थापना, संचालन और विस्तार से जुड़ी जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया है। सरकार की ओर से दाखिल अनुपालन हलफनामे में बताया गया कि दो नवंबर 2026 को जारी शासनादेश के माध्यम से तीन नई संस्थाओं के लिए बजट मंजूर किया गया है। इनमें केंद्रीय कारागार फतेहगढ़ में 100 बंदियों, नारी बंदी निकेतन लखनऊ में 50 महिला बंदियों और जिला कारागार गौतमबुद्धनगर में 80 बंदियों की क्षमता वाली संस्थाएं स्थापित की जाएंगी। यानी कुल 230 बंदियों को इन सुविधाओं का लाभ मिल सकेगा।
अपर महाधिवक्ता ने आश्वासन दिया कि इन संस्थाओं की स्थापना में अब देरी नहीं होगी। हालांकि, कोर्ट ने केवल आश्वासन को पर्याप्त नहीं माना। कोर्ट ने कहा कि सरकार को निश्चित समयसीमा बतानी होगी कि निर्माण कब शुरू होगा और कब पूरा होगा। इसके साथ ही यह भी स्पष्ट करना होगा कि खुली जेलों के लिए पात्र दोषियों की पहचान और चयन किस तरह किया जाएगा।
कोर्ट ने जेल प्रशासन एवं सुधार विभाग के विशेष सचिव को नया हलफनामा दाखिल करने का आदेश दिया है। इसमें निर्माण एजेंसी के चयन, आवश्यक निर्माण कार्यों, निर्माण की समयसीमा और पात्र बंदियों की पहचान के लिए उठाए गए या उठाए जाने वाले कदमों का ब्योरा देना होगा। मामले की अगली सुनवाई 20 नवंबर को दोपहर दो बजे होगी।