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Health : बिना ब्लड सैंपल लिए हो सकेेंगी 36 तरह की जांचें, एआई की मदद से तैयार किया जा रहा सिस्टम

Sat, 21 Sep 2024 01:18 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

एमएनएनआईटी के इनोवेशन एंड इंक्यूबेशन हब की ओर से दो दिवसीय स्टार्टअप संगम बृहस्पतिवार से शुरू हुआ। इसमें देश भर से 35 स्टार्टअप साझा किए गए। हेल्थकेयर के स्टार्टअप एआईवीओटी ने लोगों का ध्यान खींचा।
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स्वास्थ्य। - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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महंगी जांच से निजात मिलने वाली है। इस दिशा में इंजीनियरों ने कदम बढ़ा दिया है। मोतीलाल नेहरु राष्ट्रीय प्राैद्योगिकी संस्थान (एमएनएनआईटी) के पुरा छात्र प्रदीप गुप्ता और उनकी टीम ने आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस की मदद से ऐसा सिस्टम तैयार किया जिससे बिना ब्लड निकाले महज चेहरा देखकर 36 तरह की जांच हो सकेगी।

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एमएनएनआईटी के इनोवेशन एंड इंक्यूबेशन हब की ओर से दो दिवसीय स्टार्टअप संगम बृहस्पतिवार से शुरू हुआ। इसमें देश भर से 35 स्टार्टअप साझा किए गए। हेल्थकेयर के स्टार्टअप एआईवीओटी ने लोगों का ध्यान खींचा। इसके प्रबंध निदेशक प्रदीप गुप्ता ने बताया कि उनका स्टार्टअप लोगों का हेल्थ चेकअप का खर्च कम करेगा। एआई की मदद से तैयार एप मरीज का एक मिनट का वीडियो बनाएगा। उस वीडियो के जरिये मरीज के चेहरे से 36 तरह की जांचें हो जाएंगी। थोड़ी देर में उसकी रिपोर्ट सामने होगी।

वह एप आरजीबी (रेड, ग्रीन और ब्लू) से बीमारी का एनालिसिस करेगा। रेड यानी ब्लड, ग्रीन यानी हार्ट और ब्लू यानी स्किन है। इतनी जांच कराने के लिए मरीजों को अभी हजारों रुपये खर्च करने पड़ते हैं लेकिन इस एप से जांच कराने पर कुछ रुपये में ही काम हो जाएगा। इस तकनीक का उन्होंने पेटेंट भी करवा लिया है। सेंट्रल ड्रग स्टैंडर्ड कंट्रोल ऑर्गनाइजेशन (सीडीएससीओ) से भी मान्यता मिल गई है। अगले कुछ महीनों में इसका एप लॉन्च होगा।

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चेहरा देखकर होंगी यह जांचें

ब्लड प्रेशर, मीन आर्टेरियल प्रेशर, हार्ट रेट, एचआरवी पैरामीटर, आक्सीजन सेचुरेशन, एसपीओटू, रेस्पीरेशन रेट, पल्स रेस्परेटरी, पीआरक्यू, स्ट्रेस इंडेक्स, एसएनएस इंडेक्स, पीएनएस इंडेक्स, कार्डियक आउटपुट, कार्डियक इंडेक्स, स्ट्रोक वैल्यूम, आरबीएस, हीमोग्लोबिन, मीन प्लाज्मा ग्लूकोज, एचबीएवन सी, एचडीएल/एलडीएल, वीएलडीएल, टोटल कोलस्ट्रोल, फैट, बाॅडी माॅस, बाॅडी फैट माॅस, वीस्कैरल बाॅडी फैट, बाॅडी सरफेस एरिया, प्रोटीन, बीएमआर, बीएमआई, एसजीओटी, एसजीपीटी, जीजीपीटी, फैटी लीवर आदि की जांच हो सकेगी।

120 किलोमीटर तक भेज रहे ड्रोन

एमएनएनआईटी के पुराछात्र किशन तिवारी ने ड्रोन के क्षेत्र में बेहतर काम किया है। कोरोना काल से वह देशभर के अलग-अलग हिस्सों में ड्रोन की सेवा दे रहे हैं। कोराना महामारी के वक्त ड्रोन से दवाएं पहुंचाई गईं। इस क्षेत्र में लगातार काम करते हुए अब वह आठ किलो की सामग्री 120 किलोमीटर तक भेजने में सक्षम हैं। सरकारी से लेकर निजी स्तर पर उनके ड्रोन का प्रयोग हो रहा है। उत्तराखंड के पहाड़ी इलाकों और झारखंड व ओडिशा के दुर्गम इलाकों में वह ड्रोन की सेवा दे रहे हैं। मूलत: देवरिया के रहने वाले किशन ने 2019 में एमएनएनआईटी से बीटेक किया था।
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नवाचार को मिला मिला मंच

दो दिवसीय स्टार्टअप संगम में नवाचार को मंच मिला। इसमें उद्योग विशेषज्ञों, स्टार्टअप संस्थापकों, छात्रों और निवेशकों ने भाग लिया। इसका उद्देश्य स्टार्टअप इकोसिस्टम को सशक्त करना और युवा उद्यमियों को प्रेरित करना था। एमटेक सीईओ श्याम कुमार ने स्टार्टअप को निवेशकों के सामने प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करने के टिप्स दिए।बायोटेक्नोलॉजी विभाग के डॉ. इमरान ने सफल स्टार्टअप की यात्रा बताई। आईआईटी कानपुर के प्रोफेसर जे. रामकुमार ने छात्रों को उनके नवाचारों और विचारों को सफल स्टार्टअप में बदलने का तरीका बताया। कैशक्राई के संस्थापक और प्रबंध निदेशक भानु प्रताप सिंह ने अपनी सफलता की प्रेरणादायक कहानी सुनाई। कार्यक्रम में इनोवेशन एंड इंक्यूबेशन हब के निदेशक मंडल के सदस्य प्रो. आरपी तिवारी, प्रो. बसंत कुमार, प्रो. अनिमेश कुमार ओझा, डॉ. अनुभव रावत, डॉ. राम कुमार मिश्रा, डॉ. संजय कुमार, प्रदीप सिंह, सूरज तिवारी, रवि पांडेय आदि थे।
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