तीन माह में एसआरएन की दशा सुधारे सरकार
0 मेडिकल व्यवस्था दुरुस्त न होने पर हाईकोर्ट ने जताई नाराजगी
0 कानून में संशोधन किए बिना डॉक्टरों की सेवानिवृत्ति आयु 65 वर्ष करने पर जवाब तलब
अमर उजाला ब्यूरो
प्रयागराज। हाईकोर्ट ने प्रदेश सरकार से कहा कि वह स्वरूपरानी नेहरू अस्पताल और मोतीलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज की दशा तीन माह में सुधार ले। अस्पताल की खराब हालत पर गहरी नाराजगी जाहिर करते हुए अदालत ने कहा कि कोर्ट को गुमराह करने की कोशिश की गई और गलत हलफनामा दिया गया। अदालत में मौजूद प्रमुख सचिव चिकित्सा शिक्षा डॉक्टर रजनीश दुबे को तीन सप्ताह में गलत हलफनामा देने वालों के खिलाफ कार्रवाई करने का निर्देश दिया है।
प्रदेश में चिकित्सा व्यवस्था की हालत की मॉनिटरिंग कर रही न्यायमूर्ति सुधीर अग्रवाल की अध्यक्षता वाली पीठ ने प्रमुख सचिव को यह भी आदेश दिया है कि तीन सप्ताह में अस्पताल का स्पेशल ऑडिट और विजलेंस जांच कराकर रिपोर्ट सौंपी जाए। हाईकोर्ट ने इससे पूर्व के आदेश में अस्पतालों का नियमित ऑडिट और विजलेंस जांच कराने का निर्देश दिया था। कोर्ट ने इस बात पर भी नाराजगी जताई कि डाक्टरों की सेवानिवृत्ति आयु बिना एक्ट में संशोधन किए सिर्फ शासनादेश जारी कर 58 से 65 वर्ष कर दी गई है। कोर्ट ने सरकार से इस मामले में भी जवाब दाखिल करने को कहा कि बिना विधानसभा में कानून संशोधित किए सेवानिवृत्ति आयु बढ़ा दी गई है।
याचिका में हाईकोर्ट कर्मचारी अधिकारी संघ के महासचिव बृजेश कुमार शुक्ला भी पक्षकार बने हैं। उन्होंने अर्जी दाखिल कर स्वरूपरानी अस्पताल की खस्ता हालत में सुधार करने की मांग की है। कोर्ट ने इस पर सुनवाई के बाद प्रमुख सचिव से कहा कि उनकी ओर से जो हलफनामा दिया गया है वह गलत है। इस पर प्रमुख सचिव ने बताया कि उन्होंने स्थानीय प्रशासन द्वारा उपलब्ध कराई गई जानकारी के आधार पर हलफनामा दिया है। कोर्ट ने गलत जानकारी देने वालों पर कार्रवाई कर सूचित करने का निर्देश दिया है। याचिका पर तीन सप्ताह के बाद सुनवाई होगी।