खस्ताहाल चिकित्सा व्यवस्था
सुधारने को क्या किया: हाईकोर्ट
0 मुख्य सचिव से मांगी रिपोर्ट, प्रमुख सचिव, मेडिकल कॉलेज प्राचार्य तलब
0 हाईकोर्ट ने दिया अस्पतालों में वीआईपी कल्चर खत्म करने का आदेश
अमर उजाला ब्यूरो
प्रयागराज। सरकारी अस्पतालों में वीआईपी कल्चर खत्म करने, निजी अस्पताल में इलाज कराने पर सरकारी कर्मचारी को चिकित्सा भत्ता नहीं देने जैसे तमाम आदेेशों पर हाईकोर्ट ने प्रदेश सरकार से अनुपालन रिपोर्ट तलब की है। कोर्ट ने मुख्य सचिव को निर्देश दिया कि सूबे की खस्ताहाल चिकित्सा व्यवस्था को सुधारने के लिए उठाए गए कदमों की जानकारी दी जाए। यदि हलफनामा नहीं देेते हैं तो 29 जनवरी को मुख्य सचिव स्वयं उपस्थित हों।
कोर्ट ने स्वरूपरानी अस्पताल में ट्रामा सेंटर शुरू होने की बाबत गलत हलफनामा दाखिल करने पर प्रमुख सचिव चिकित्सा शिक्षा रजनीश दुबे और प्राचार्य मोतीलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज डॉ. एसपी सिंह को तलब किया है। स्नेहलता सिंह और अन्य की जनहित याचिका पर न्यायमूर्ति सुधीर अग्रवाल की अध्यक्षता वाली पीठ सुनवाई कर रही है। हाईकोर्ट अधिकारी कर्मचारी संघ ने इस याचिका में अर्जी देकर आदेशों को शिथिल करने की मांग की है। एसोसिएशन का कहना है कि कोर्ट ने प्राइवेट अस्पताल में इलाज कराने वाले सरकारी कर्मचारियों को चिकित्सा भत्ता नहीं देने का आदेश दिया है।
वास्तविकता यह है कि सरकारी अस्पतालों में गंभीर बीमारियों का इलाज करने की सुविधाएं नहीं हैं। कर्मचारियों को मजबूरी में प्राइवेट अस्पतालों में इलाज कराना पड़ रहा है, जिससे उनको चिकित्सा भत्ता नहीं मिल पा रहा है। हाईकोर्ट ने मोतीलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज का स्पेशल ऑडिट कराने, डॉक्टरों के प्राइवेट प्रैक्टिस की विजलेंस जांच, पैरामेडिकल और स्टॉफ के रिक्त पदों को भरने, ट्रामा सेंटर की सुविधाएं देने, ट्रैफिक प्लान, अतिक्रमण, पार्किंग सहित तमाम सुधारात्मक आदेश दिए थे। इनके अनुपालन के संबंध में प्रमुख सचिव ने जो हलफनामा दाखिल किया उसे कोर्ट ने संतोषजनक नहीं माना है और मुख्य सचिव को हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है।