यूपी बोर्ड की इंटरमीडिएट प्रयोगात्मक परीक्षा 2019 कराने वाले परीक्षकों को अब बोर्ड के क्षेत्रीय कार्यालय को परीक्षा कराने का रिकार्ड भेजना पड़ रहा है। बोर्ड की ओर से इंटरमीडिएट की प्रयोगात्मक परीक्षाएं 15 दिसंबर से शुरू हो गई हैं। बोर्ड ने परीक्षकों को निर्देश दिया है कि वह प्रयोगात्मक परीक्षा कराने से पहले संबंधित विद्यालय के मुख्य प्रवेश द्वार जहां विद्यालय का नाम प्रदर्शित हो रहा हो, उसकी एक सेल्फी खींचकर उसे बोर्ड के क्षेत्रीय कार्यालय को भेजें। क्षेत्रीय कार्यालय परीक्षक की ओर से भेजी गई सेल्फी को बोर्ड मुख्यालय भेजने की व्यवस्था करें। यह निर्देश बोर्ड सचिव नीना श्रीवास्तव ने जारी किया है।
यूपी बोर्ड ने प्रयोगात्मक परीक्षा सीसीटीवी की निगरानी में कराने और पूरी परीक्षा की वीडियो रिकार्डिंग कराने और परीक्षा की मोबाइल रिकार्डिंग करने के साथ रिकार्डिंग की क्लिप बनाकर सुरक्षित करने और उसे जिला विद्यालय निरीक्षक के माध्यम से बोर्ड मुख्यालय को भेजने का निर्देश दिया है। यूपी बोर्ड की ओर से प्रयोगात्मक परीक्षा से पहले सेल्फी बनाकर भेजने और परीक्षा सीसीटीवी की निगरानी में कराने के साथ वीडियो रिकार्डिंग कराए जाने का आदेश परीक्षकों और केंद्र व्यवस्थापकों के बीच बने गठजोड़ को तोड़ने के लिए लिया गया है। बोर्ड के पास इस बात की शिकायत लगातार पहुंचती रहती है कि परीक्षक बिना परीक्षा कराए नंबर देते हैं। बोर्ड के इस निर्देश के बाद प्रयोगात्मक परीक्षा में मनमानी करने वाले परीक्षकों की परेशानी बढ़ गई है। नए नियम के बाद परीक्षक प्रयोगात्मक परीक्षा से किनारा भी कर सकते हैं।
परीक्षक, केंद्र व्यवस्थापकों से मिलकर वह बिना परीक्षा केंद्र पर गए ही कॉपी लिखवाकर मंगा लेते हैं, बिना गए ही परीक्षा के अंक बोर्ड को भेज देते हैं। उत्तर प्रदेश प्रधानाचार्य परिषद के मीडिया प्रभारी एवं इलाहाबाद इंटर कॉलेज के प्रधानाचार्य एसपी तिवारी का कहना है कि बोर्ड की ओर से नई व्यवस्था किए जाने के बाद केंद्र व्यवस्थापकों एवं परीक्षकों के गठजोड़ पर रोक लगेगी, अब परीक्षक संबंधित केंद्रों पर जाकर परीक्षा कराएंगे। इससे पूरे वर्ष पढ़ाई करने वाले बच्चों के साथ न्याय होगा। उन्होंने कहा कि बोर्ड के इस नियम से पारदर्शिता आएगी।