पत्नी के हत्यारे की फांसी की सजा उम्रकैद में तब्दील
0 हाईकोर्ट ने कहा हत्या में उम्रकैद नियम, फांसी अपवाद
प्रयागराज। हाईकोर्ट ने पत्नी की हत्या के जुर्म में फांसी की सजा पाए अभियुक्त को राहत देते हुए उसकी सजा उम्रकैद में तब्दील कर दी है। फैसला सुनाते हुए अदालत ने कहा कि मौजूदा अपराध के तथ्य और परिस्थितियां तथा अभियुक्त का चरित्र ऐसा नहीं है जिससे कहा जा सके कि सिवाए मृत्यु दंड के और कोई रास्ता बचा नहीं है। कोर्ट ने कहा कि यह स्थापित कानून है कि हत्या के अपराध में उम्रकैद देना एक नियम है, जबकि फांसी देना अपवाद। जौनपुर के मनोज कुमार की सजा के खिलाफ अपील और अधीनस्थ न्यायालय द्वारा फांसी की सजा के रेफरेंस पर न्यायमूर्ति सुधीर अग्रवाल और न्यायमूर्ति ओमप्रकाश सप्तम ने सुनवाई की।
घटना जौनपुर के बक्सा थानाक्षेत्र के ससैनी गांव की 27 सितंबर 2012 की है। अभियुक्त मनोज कुमार ने अपनी पत्नी सुषमादेवी पर सुबह चार बजे मिट्टी का तेल डालकर आग लगा दी थी। गंभीर रूप से झुलसी अवस्था में उसे पहले पुलिस पोस्ट फिर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया था। बाद में जिला अस्पताल में चिकित्सा अधीक्षक ने सुषमा का मृत्यु पूर्व बयान दर्ज किया। अपने बयान में सुषमा ने पति पर प्रताड़ना करने और मिट्टी का तेल डालकर जला देने का आरोप लगाया। अभियोजन ने अपना पक्ष साबित करने के लिए दस गवाह प्रस्तुत किए। गवाहों में सुषमा की नाबालिग बेटी भी थी जिसने घटना अपनी आंखों से देखी थी। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश जौनपुर ने मनोज कुमार हत्या का दोषी करार देते हुए उसके अपराध को जघन्यतम से जघन्य माना और फांसी के साथ ही 20 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई।
सजा के खिलाफ दाखिल अपील पर सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने कहा है कि मौजूदा मामला रेयरेस्ट ऑफ रेयर की श्रेणी में नहीं है। अभियुक्त आदतन अपराधी नहीं है और न ही उससे समाज को किसी प्रकार का खतरा प्रतीत होता है। ऐसी दशा में उम्रकैद से न्याय की मंशा पूरी होती है। कोर्ट ने फांसी की सजा को उम्रकैद में तब्दील करते हुए 20 हजार रुपये जुर्माने की सजा बहाल रखी है।