खाद ने खाक में मिलाए किसानों के अरमान
डीएपी की कीमतें बेतहाशा बढ़ीं, यूरिया की बोरी हुई हल्की
एक बोरी के मूल्य में 227 रुपए की वृद्धि, किसान परेशान
यूरिया की बोरी 50 के बजाय की गई 45 किग्रा
अमर उजाला ब्यूरो
इलाहाबाद। किसानों को राहत देने के नाम पर सरकार उनसे छलावा कर रही है। डीएपी की कीमतों में चुपके से 227 रुपये प्रति बोरी का इजाफा कर दिया गया है। पहले डीएपी 1063 रुपये प्रति बोरी मिल रही थी, वही डीएपी अब 1290 रुपये प्रति बोरी मिल रही है। डीएपी की कीमतों में अचानक वृद्धि ने महंगाई व सूखे से जूझ रहे किसानों की कमर ही तोड़ कर रख दी है।
डीएपी का दाम बढ़ाने के साथ-साथ सरकार ने एक और दांव चला है। किसानों को साधन सहकारी समितियों और बिक्री केंद्रों से मिलने वाली यूरिया की बोरी 50 किग्रा की होती थी। बाजार में किसानों को यह बोरी 330.50 रुपये में मिलती थी। वहीं जुलाई माह में इफको से आने वाली यूरिया की बोरी 45 किग्रा की हो गई है, जिसकी कीमत 299 रुपये कर दी गई है। डीएपी के मूल्य में बढ़ोतरी और बोरी में यूरिया की मात्रा घटाने के पीछे सरकार और अफसरों का पक्ष भी चौंकाने वाला है। उनका कहना है कि रासायनिक खाद का उपयोग कम करने के लिए इस तरह की पहल की गई है।
यूरिया की बढ़ी डिमांड
धान की रोपाई के साथ ही यूरिया की मांग बढ़ गई है। साधन सहकारी समितियों और दुकानों पर नई बोरियां किसानों को दी जा रही हैं। अधिकांश किसान फसलों में छिड़काव करने के लिए अभी से खाद की खरीदारी कर रहे हैं।
45 किग्रा वजन वाली यूरिया बाजार में पहुंच रही है। इससे किसानों के अंधाधुंध यूरिया के प्रयोग पर रोक लगेगी। डीएपी के दाम में बढ़ोतरी भी इसी मकसद से की गई है। ताकि, किसान जैविक खाद का उपयोग बढ़ाएं। - अश्वनी कुमार सिंह, जिला कृषि अधिकारी
सिंचाई भी हुई महंगी
इस बार धान की खेती और महंगी हो गई है। बारिश नहीं होने से नर्सरी पीली पड़ने लगी है। ऐसे मेें किसान पंपिंगसेट से सिंचाई कर फसल को बचाने की जद्दोजहद में जुटे हैं, लेकिन इसके लिए उन्हें भारी कीमत चुकानी पड़ रही है। रोपाई के लिए जरूरी है कि खेत में पानी भरा हो। इसके लिए किसानों पर प्रति बीघा 500 रुपये खर्च बढ़ गया है। यह एक सिंचाई का खर्च है। बारिश नहीं हुई तो आगे और खर्च करना होगा। इसके बाद भी उत्पादन में कमी तय है। यह सुविधा भी बड़े किसानों के लिए है। छोटे किसान तो भगवान भरोसे ही हैं।