लोक, शिल्प की सौगातें दे
विदा हुए शिल्पी, कलाकार
0 दस दिनी शिल्प मेले के दौरान हुई तकरीबन दो करोड़ रुपये की बिक्री
इलाहाबाद। उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केन्द्र के शिल्प हाट में दो दिसंबर से आयोजित दस दिनी राष्ट्रीय शिल्प मेला सोमवार को पूरा हुआ। कला और संस्कृति से जुड़ी अनेक सौगातें देकर शिल्पकार और देश की सांस्कृतिक विविधता से परिचित कराके लोक कलाकारों का कुनबा तमाम यादें देकर विदा हो गया। टेराकोटा सहित असम के बांस के शिल्प आदि के अतिरिक्त अनेक प्रांतों के विविध व्यंजनों वाले स्टाल भी खाली हुए।
खास यह रहा कि अबकी शिल्प मेले में सजे तकरीबन 151 स्टाल पर दस दिनों के दौरान तकरीबन दो करोड़ रुपये की रिकार्ड बिक्री हुई जो बीते वर्ष से तकीरबन 25 लाख रुपये ज्यादा है। इस दौरान तकरीबन सवा लाख दर्शक मेला देखने आए।
सोमवार को बस्ती की अंकिता श्रीवास्तव एवं दल की ओर से सुगम संगीत ‘पायोजी मैंने राम रतन धन पायो’ से शुरुआत के बाद देश के सपूतों को समर्पित गीत ‘ऐ मेरे वतन के लोगों, जरा याद करो कुर्बानी’ सुनाकर तालियां बटोरीं। ह्रदय मिश्र एवं दल ने भोजपुरी लोकगीत सुनाकर मुग्ध किया। राजस्थान का मशहूर लोक गीत लंगा कसम खां एवं उनके दल ने प्रस्तुत किया। डिंडौरी, मध्य प्रदेश के रमेश मरावी एवं दल की ओर से गुदुम बाजा, रीना शैला नृत्य मध्य प्रदेश की सुमन परस्ते एवं दल, असम का बिहू लोक नृत्य ज्वायदेव डेका एवं दल ने प्रस्तुत किया। बहुरंगी लोकछवियों ने सभी को लुभाया। प्रभारी निदेशक नरेंद्र सिंह ने स्वागत, संजय पुरुषार्थी ने संचालन और कार्यक्रम अधिकारी कल्पना सहाय ने सभी के प्रति धन्यवाद ज्ञापित किया।
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रविवार को बिके रिकार्ड टिकट
इलाहाबाद। शिल्प मेले के दौरान रविवार को एक और रिकार्ड कायम हुआ। एक दिन में 15,700 टिकटों की बिक्री हुई जबकि दस वर्ष से छोटे बच्चों और सीनियर सिटिजन्स केलिए प्रवेश नि:शुल्क था। यह भी वर्ष 1994 से लगने वाले शिल्प मेले के लिए अब तक का रिकार्ड है।
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चर्चित रहा मोबाइल एटीएम
शिल्प मेले में डिजिटल इंडिया की छाप दिखी। संगम की रेती पर लगने वाले कुंभ मेले के बाद संभवत: यह दूसरा मेला रहा जब मोबाइल एटीएम की व्यवस्था की गई थी। केंद्र की ओर से मोबाइल एटीएम की व्यवस्था से जहां शिल्पकारों को लाभ हुआ, वहीं शहरियों को भी खरीदारी में आसानी हुई। लोगो ने स्वाइप मशीन से टिकट लिया। इससे फुटकर की दिक्कत भी नहीं आई।