रायबरेली-बांदा राजमार्ग के चौड़ीकरण का रास्ता साफ
0 अधिग्रहण के खिलाफ याचिका हाईकोर्ट ने खारिज की
अमर उजाला ब्यूरो
इलाहाबाद। रायबरेली-बांदा राजमार्ग के चौड़ीकरण को चुनौती देनी वाली याचिका हाईकोर्ट ने खारिज कर दी है। ऐसे में मार्ग को चौड़ा करने का रास्ता साफ हो गया है। राजमार्ग के लिए 17 गांवों की 6.8168 हेक्टेयर भूमि अधिग्रहीत की गई है। किसानों ने अधिग्रहण पर आपत्ति करते हुए हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी। कोर्ट ने याचिकाओं पर यह कहते हुए हस्तक्षेप करने से इंकार कर दिया कि विलंब से दाखिल की गई आपत्ति पर याचीगण को कोई राहत नहीं दी जा सकती है।
बांदा केमहोखर गांव के किसान हिमांशु कुमार और अन्य की याचिकाओं पर न्यायमूर्ति दिलीप गुप्ता और न्यायमूर्ति डीके सिंह की खंडपीठ ने सुनवाई की। कोर्ट ने इस मामले के वैधानिक पहलुओं पर विचार करते हुए कि इस प्रकार के मामलों में विलंब से दाखिल होने वाली याचिकाएं स्वीकार नहीं की जा सकती है। नेशनल हाईवे-अथॉरिटी के समक्ष आपत्ति दाखिल करने की समय सीमा 21 दिन की है। यह समय बीत जाने के बाद आपत्ति स्वीकार नहीं की जा सकती है। अथॉरिटी के प्रोजेक्ट तकनीकी रूप से कितने उपयोगी हैं, इसे तय करने के मामले में अदालतों का सीमित क्षेत्राधिकार है।
अथॉरिटी की ओर से अधिवक्ता प्रांजल मेहरोत्रा ने पक्ष रखा। 14 जनवरी 2013 को राष्ट्रीय राजमार्ग के चौड़ीकरण हेतु जमीन का अधिग्रहण किया। याचीगण को अथॉरिटी की नियमावली के तहत आपत्ति दाखिल करने के लिए 21 दिन का समय दिया गया। याची की 2461 वर्ग मीटर भूमि अधिग्रहीत की गई। उसने आठ मार्च 2013 को आपत्ति दाखिल कर कहा कि 0.02461 हेक्टेयर जमीन ही ली जाए। याची को एक जनवरी 2017 को नोटिस देकर अवगत कराया कि उसका अवार्ड हो गया और मुआवजा प्राप्त कर सकता है। इसके खिलाफ याचिका दाखिल कर कहा गया कि प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया। अथॉरिटी के अधिवक्ता का कहना था कि चार साल के विलंब से आपत्ति नहीं दाखिल की जा सकती है। प्रदेश सरकार का कहना था कि 65 किसानों की आपत्ति निस्तारित नहीं की जा सकी हैं।