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जलभराव से आफत, घंटों लगा रहा जाम

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कहीं जलभराव, कहीं सूखी रहीं सड़कें
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- दोपहर में हुई बारिश से लगा भीषण जाम, स्कूल से छूटे बच्चे फंसे, रेंगती रहीं गाड़ियां
अमर उजाला ब्यूरो
इलाहाबाद।
उमस भरी गर्मी के बीच बृहस्पतिवार को बादल बरसे तो शहर की तमाम सड़कें जलमग्न हो गईं। भीषण जाम भी लग गया। दोपहर में करीब सवा घंटे में 4 मिमी. बारिश हुई। स्कूल से छुट्टी के बाद घर को निकले बच्चे भी जाम में फंसे रहे। सिविल लाइंस हनुमान मंदिर से मेडिकल चौराहे तक लगे जाम में फंस कर लोग ज्यादा परेशान हुए। इस छोटी सी दूरी तय करने में डेढ़ से दो घंटे का समय लगा। निरंजन और अल्लापुर डॉट पुल के नीचे भी पानी जमा होने से घंटों दिक्कत बनी रही।
हालांकि, बारिश से शहर के कुछ मोहल्ले अछूते रहे। गऊघाट से गुजर रहे लोग भीगे, लेकिन बीच वाली सड़क पर पानी नहीं रहा। हल्की बारिश में जलजमाव की परेशानी झेलने वाले मम्मफोर्डगंज के निवासियों को कुछ बूंदों से ही संतोष करना पड़ा। सिविल लाइंस, लूकरगंज, बेनीगंज, अल्लापुर, दारागंज, मुट्ठीगंज, मीरापुर, सलोरी, कटरा, नैनी, दादागंज इलाके में झमाझम बारिश हुई। लूकरगंज इलाके में घुटने तक पानी लगा। स्टेशन रोड, खुल्दाबाद आदि क्षेत्रों में जलजमाव से घंटों दिक्कत रही। सिविल लाइंस के संपर्क मार्गों पर पानी लगने से लोग परेशान हुए।
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सर्वाधिक परेशानी स्कूल की छुट्टी होने के बाद घर जा रहे बच्चों को हुई। हर सड़क पर जाम का झाम रहा। जहां ट्राली फंस जाती वहां से निकलने में एक से दो घंटे लगे। निरंजन डॉट पुल और अल्लापुर डॉट पुल के नीचे पानी भरने से लगा जाम मुसीबत बना रहा। अल्लापुर में 80 फिट से 60 फिट रोड के टर्निंग प्वाइंट पर जाम लगा रहा। मेडिकल चौराहे पर मेनहोल ओवरफ्लो होने से गंदा पानी सड़क पर भर गया। जीएचएस, एसएमसी, बीएचएस आदि स्कूलों से छुट्टी के बाद पुराने शहर में रहने वाले बच्चे तीन बजे के बाद ही घर पहुंचे। हालांकि तीन बजे फिर धूप खिल गई लेकिन जलजमाव और जाम की परेशानी से शहरी जूझते ही रहे।

सितंबर में औसत की दशांश बारिश
इलाहाबाद। विदाई की बेला में बृहस्पतिवार को मानसून ने राहत दी। अनुमानत: 4 मिमी बारिश ने शहरियों को उमस भरी गर्मी से फौरी राहत दी। मौसम और कृषि वैज्ञानिकों का मानना है कि किसानों के लिए पानी की ये बूंदें संजीवनी से कम नहीं हैं। फिलहाल, जुलाई में रिकार्ड बना चुकी बारिश ने अगस्त में तरसाया। अब सितंबर में औसतन 180 मिमी बारिश के सापेक्ष 13 दिन में सिर्फ 14.2 मिमी यानी दशांश बारिश दर्ज की गई है।
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मौसम विज्ञानी प्रो. एसएस ओझा के मुताबिक सूरज के ताप से पारा चढ़ा रहा। पुरवइया और पछुआ हवाओं की टकराहट से बादल भटकते रहे। पारा घटता तो संघमन से बूंदे बनतीं और बारिश होती लेकिन क्रिया में वाष्पीकरण हो गया। इस कारण उमस भरी गर्मी ने परेशान किया। वायुमंडल में गर्मी से बादल टिक नहीं सके। बादल छाए लेकिन बरस नहीं सके। पूर्वानुमान भी ध्वस्त हो गए। अब मानसून के विदाई की बेला है। पश्चिमी हवाएं जोर बांधे हैं। ऐसे में मौसम बदलेगा। बारिश की संभावना बादलों के टिकने पर है, वो भी हल्की ही होगी।
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