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यादव सिंह के सहयोगी को सरेंडर करने का निर्देश
0 एनबीडब्ल्यू पर हस्तक्षेप से हाईकोर्ट का इंकार, सीबीआई से जवाब तलब
अमर उजाला ब्यूरो
इलाहाबाद। हाईकोर्ट ने हजारों करोड़ रुपये के घोटाले के आरोपी नोएडा के पूर्व अधिकारी यादव सिंह के सहयोगी विमल कुमार मंगलम को दो सप्ताह के भीतर सीबीआई कोर्ट गाजियाबाद में समर्पण करने का आदेश दिया है। कोर्ट ने विमल कुमार के खिलाफ सीबीआई अदालत द्वारा जारी गैरजमानती वारंट पर हस्तक्षेप करने से इंकार कर दिया है। सीबीआई से इस मामले में दो सप्ताह में जवाब दाखिल को कहा है। याचिका पर 27 जुलाई को अगली सुनवाई होगी।
विमल कुमार की याचिका पर न्यायमूर्ति अरविंद कुमार त्रिपाठी और न्यायमूर्ति डीएस त्रिपाठी की खंडपीठ सुनवाई कर रही है। याचिका में कहा गया है कि हाईकोर्ट ने 14 दिसंबर 2011 से 23 दिसंबर 2011 के बीच जारी टेंडरों की जांच का सीबीआई को आदेश दिया था। मगर सीबीआई ने इसके बाद के टेंडरों की जांच की और 31 मई 2017 को सीबीआई ने यादव सिंह, विमल कुमार और अन्य आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की। इस पर विशेष अदालत सीबीआई ने आरोपियों को समन जारी करने के बजाए सीधे गैर जमानती वारंट जारी कर दिया। इसकी सूचना याची को समाचार पत्र के माध्यम से मिली। याची नोएडा से 31 मार्च 2017 को रिटायर हो चुका है।
याची का कहना है कि सीबीआई द्वारा दाखिल चार्जशीट विधि विरुद्ध है। याची के खिलाफ मुकदमा चलाने की अनुमति नहीं ली गई है। मुकदमा रद्द करने की मांग भी की गई है। सीबीआई की ओर से अधिवक्ता अमित मिश्रा ने याचिका का विरोध किया। बताया कि नूतन ठाकुर की याचिका पर हाईकोर्ट ने सीबीआई को जांच का आदेश दिया है। सीबीआई ने इस मामले में पहली चार्जशीट 12 जुलाई 2011 को दाखिल की है जिसमें 16.37 करोड़ के घोटाले का आरोप है। दूसरी चार्जशीट 13 जुलाई 2011 को 6.31 करोड़ घोटाले की, तीसरी 30 जून 2011 को 38.10 करोड़ रुपये और 22. 68 करोड़ रुपये घोटाले के आरोप में दाखिल की गई है।