चार हजार किसानों की भूमि की जा रही अधिग्रहीत
इनर रिंग रोड परियोजना में प्रभावित होने वाले किसानों के भूमि, भवनों, बगीचों, कुओं के स्वामित्व विवाद के अलावा मुआवजा संबंधी आपत्तियों का निस्तारण करने के बाद चार हजार किसानों की भूमि इसके लिए अधिग्रहीत की जा रही है। 3-डी प्रस्ताव में प्रभावित किसानों का ब्यौरा और उनकी भूमि के अलावा भवन, बाग, कुएं का भी विवरण शामिल किया गया है।
रीवा रोड से जीटी रोड पर महुआरी, लवाइन कला होते हुए अंदावा के रास्ते इस रिंग रोड को आगे ले जाकर सहसों में फिर एनएच-2 से मिला दिया जाएगा। कानपुर से वाराणसी को जाने वाले राष्ट्रीय राजमार्ग-दो पर इनर रिंग रोड के प्रथम चरण का निर्माण आगामी कुंभ मेले को ध्यान में रखकर कराया जाएगा।
कुंभ की सबसे अहम परियोजना होगी इनर रिंग रोड
आगामी कुंभ मेला को देखते हुए इस इनर रिंग रोड का निर्माण जल्द आरंभ कराया जाएगा। यह कुंभ की सबसे अहम परियोजना होगी। इस इनर रिंग रोड के के बन जाने से कानपुर से मध्य प्रदेश जाने वाले वाहनों को शहर में इंट्री नहीं करनी होगी। वहीं, एमपी से कानपुर या वाराणसी जाने वालों को भी इससे काफी राहत मिलेगी। बिना शहर में प्रवेश किए रिंग रोड के रास्ते निकल जाएंगे। इससे शहरियों को ट्रैफिक की समस्या से जूझना नहीं पड़ेगा।
क्या कहते हैं अधिकारी
भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया अंतिम रूप से पूरी करने के साथ ही एनएचएआई की धारा 3-डी के तहत प्रभावित किसानों और भूमि का रकबा जारी कर दिया गया है। अब प्रभावित किसानों को मुआवजा वितरण का काम शुरू कराया जाएगा। इस परियोजना का निर्माण जल्द आरंभ होगा, ताकि इसे कुंभ से पहले पूरा कराया जा सके। -एके राय, परियोजना निदेशक, एनएचएआई।