प्रदेश में स्थित सभी राज्य विश्वविद्यालयों, राजकीय महाविद्यालयों और अशासकीय सहायता प्राप्त महाविद्यालयों में तैनात शिक्षकों की जांच पूरी हो गई है। जांच के दौरान 27 मामले संदिग्ध पाए गए हैं। उच्च शिक्षा निदेशालय ने शासन को जांच रिपोर्ट भेज दी है। साथ ही संदिग्ध पाए गए 27 मामलों की अलग से जांच कराए जाने की सिफारिश की है।
कस्तूरबा गांधी विद्यालयों में शिक्षकों की नियुक्ति में बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़े का खुलासा होने के बाद शासन ने बेसिक, माध्यमिक से लेकर उच्च शिक्षा तक शिक्षकों की नियुक्ति को लेकर जांच शुरू कराई थी। यहां तक कि मदरसा बोर्ड के शिक्षकों की जांच भी शुरू करा दी गई।
प्रदेश के राज्य विश्वविद्यालयों, राजकीय महाविद्यालयों और अशासकीय सहायता प्राप्त महाविद्यालयों में शिक्षकों की जांच का जिम्मा उच्च शिक्षा निदेशालय को सौंपा गया था और 30 जुलाई तक जांच पूरी करने के निर्देश दिए गए थे। शासन से निर्देश मिलने के बाद उच्च शिक्षा निदेशालय की ओर सभी क्षेत्रीय उच्च श्क्षिा अधिकारियों को पत्र जारी कर जांच तत्काल शुरू करने को कहा गया था। जांच की हर सप्ताह समीक्षा की जा रही थी और 30 जुलाई तक किसी भी सूरत में जांच पूरी होनी थी।
बीच-बीच में जांच धीमी पड़ी तो उच्च शिक्षा निदेशक की ओर से क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारियों को पत्र जारी कर जांच में तेजी लाने के निर्देश भी दिए गए। इस दौरान कुल 11412 शिक्षकों की जांच की गई। जांच के दौरान यह भी देखा गया कि कौन शिक्षक अनुपस्थित है और कौन लंबे समय से छुट्टी पर चल रहा है।
साथ ही उनकी नियुक्ति से संबंधित प्रपत्र एवं शैक्षिक अभिलेखों के जांच-पड़ताल की गई। जांच में 27 मामले संदिग्ध मिले हैं। अब इन शिक्षकों के शैक्षिक अभिलेखों की जांच उन बोर्ड या विश्वविद्यालयों में कराई जाएगी, जहां से इन्होंने माध्यमिक एवं उच्च शिक्षा प्राप्त की। उच्च शिक्षा निदेशक डॉ. वंदना शर्मा ने बताया कि शिक्षकों की जांच पूरी कर ली गई है और जांच रिपोर्ट शासन को भेज दी गई है। जो मामले संदिग्ध मिले हैं, उनकी जांच अलग से कराए जाने की संस्तुति की गई है।