फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

हाईकोर्ट की टिप्पणी : 21वीं सदी में विज्ञान के बजाय तांत्रिक क्रिया पर विश्वास पाषाण युग की सोच

Fri, 14 Apr 2023 12:39 AM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने आश्चर्य व्यक्त करते हुए कहा है कि 21वीं सदी में विज्ञान ने इतनी प्रगति कर ली है कि स्त्री-पुरुष की प्रजनन क्षमता का पता लगाया जा सके। लेकिन कुछ लोग अभी भी पाषाण युग में जी रहे हैं जो परिवार की दिक्कतें दूर करने के लिए तांत्रिक क्रिया पर भरोसा करते हैं।
विज्ञापन
Allahabad High Court - फोटो : social media
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने आश्चर्य व्यक्त करते हुए कहा है कि 21वीं सदी में विज्ञान ने इतनी प्रगति कर ली है कि स्त्री-पुरुष की प्रजनन क्षमता का पता लगाया जा सके। लेकिन कुछ लोग अभी भी पाषाण युग में जी रहे हैं जो परिवार की दिक्कतें दूर करने के लिए तांत्रिक क्रिया पर भरोसा करते हैं।

कोर्ट ने कई बरस तक गर्भ न ठहरने पर स्त्री को तांत्रिक के हवाले कर तपते चिमटे से जलाकर मार डालने के दहेज हत्या, षड्यंत्र के आरोपी को जमानत देने से इन्कार कर दिया है और कोई विधिक अड़चन न होने की दशा में ट्रायल एक साल में पूरा करने का निर्देश दिया है। यह आदेश न्यायमूर्ति सौरभ श्याम शमशेरी ने शाहजहांपुर थाना पुवायां के दुर्वेश की अर्जी को खारिज करते हुए दिया है।

कोर्ट ने कहा यह कैसी मानसिकता है कि पुरुष संतान पैदा न होने पर महिला को ही दोषी देता है। अपने को दोष नहीं देता। याची मृतका का देवर है। जिसने परिवार के साथ षड्यंत्र में शामिल होकर महिला को तांत्रिक क्रिया में गर्म चिमटे से जलाने दिया। जलने की 17 चोटों के कारण महिला कोमा में चली गई और मौत हो गई। घटना के चश्मदीद गवाह अभियोजन की कहानी को संबल प्रदान कर रहे हैं। ऐसे अपराधी को जमानत पाने का हक नहीं है।

विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें