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सुस्त पड़ा पांटून पुलों का निर्माण, लकड़ी घटी

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कुंभ मेला के लिए गंगा पर पांटून पुलों के निर्माण के लिए बना इस्टीमेट गड़बड़ाने से अफसरों के माथे पर बल पड़ गए हैं। दूसरे जिलों से पांटून की भरपाई करने के बाद अब लकड़ी भी घट गई है। पिछले माघ मेले में इस्तेमाल किए गए पुराने शाल स्लीपर खपाए जाने के बाद भी लकड़ी का टोटा नजर आने लगा है। इसे देखते हुए पीएडब्ल्यूडी ने दोबारा 18 करोड़ रुपये की लकड़ी मंगाने की स्वीकृति ली है। अरुणांचल प्रदेश और पंजाब दोनों जगहों से फिर शाल स्लीपर मंगाए जाएंगे, ताकि पुलों का निर्माण कराया जा सके।
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इस बार कुंभ की भूमि का दोगुना विस्तार होने के साथ ही फाफामऊ से अरैल के बीच श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए 22 पांटून पुलों का निर्माण होना है। पीडब्ल्यूडी के अभियंताओं ने अस्थाई पुल निर्माण के लिए पांटून, लकड़ी और अन्य सामग्री का जो आकलन किया, वह सही नहीं निकला। पहले पांटून घटे थे। इससे कई पुलों का निर्माण बाधित होने से अफसरों ने तमाम पुराने और आसपास के पुलों में लगाए गए पांटून मंगवा लिए थे। इसके बाद कौशांबी से पांटून मंगाकर कमी पूरी की गई। हर पुल पर 80 पांटून के हिसाब से इस्तीमेट बनाया गया था और करीब 1250 से अधिक पांटून बनाए गए थे।

इस बीच शाल स्लीपर भी घट गए हैं। यूपी वन निगम, अरुणाचल फॉरेस्ट कॉरपोरेशन और पंजाब फारेस्ट कॉरपोरेशन को मिलाकर कुल पांच हजार से अधिक शाल स्लीपर मंगाए गए थे। इसके साथ ही पुराने स्लीपर भी पुलों पर बिछा दिए गए, लेकिन लकड़ी पूरी नहीं हो सकी। अब पीडब्ल्यूडी के एक्सईएन कुंभ मेला विपिन पचौरिया ने फिर 10 हजार शाल स्लीपर मंगाने की स्वीकृति ली है। इसके लिए पंजाब और अरुणाचल वन निगम को कुल 18 करोड़ रुपये के आर्डर भेजे गए हैं। अभियंताओं के मुताबिक जल्द ही शाल स्लीपर की नई खेप मंगाने की कोशिश की जा रही है, ताकि काम बाधित न होने पाए।
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