एससीएसटी एक्ट की
धारा 14 पर निर्णय सुरक्षित
- संशोधित धारा 14(ए) की वैधता को दी गई है चुनौती
अमर उजाला ब्यूरो
इलाहाबाद। हाईकोर्ट ने एससीएसटी एक्ट की धारा 14(ए) की वैधता को चुनौती देने वाली याचिका पर अपना निर्णय सुरक्षित कर लिया है। इस मामले में याचिका दाखिल कर सवाल उठाया गया है कि स्पेशल कोर्ट एससीएसटी के किसी निर्णय के खिलाफ 180 दिन के भीतर अपील दाखिल न करने पर क्या कोई भी वैधानिक उपचार नहीं बचेगा। इस प्रकार से तो न्याय का दरवाजा बंद हो जाएगा, जोकि सांविधानिक अधिकारों का हनन होगा।
हाईकोर्ट को अनुच्छेद 226, 227 और 482 सीआरपीसी में रिट की अधिकारिता है। इन शक्तियों और पुनरीक्षक के अधिकार का प्रयोग एससीएसटी के मामले में किया जा सकता है या नहीं, इस पर अधिवक्ता विष्णु बिहारी तिवारी और अन्य की ओर से दाखिल याचिका पर मुख्य न्यायमूर्ति डीबी भोसले, न्यायमूर्ति रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा की पीठ ने सुनवाई की।
धारा 14(ए) में दी गई व्यवस्था के अनुसार एससीएसटी एक्ट के तहत पारित किसी आदेश के खिलाफ 90 दिन के भीतर अपील दाखिल की जा सकती है। यदि कोई इन 90 दिनों के भीतर अपील नहीं कर पाता है तो आगे और 90 दिन तक विलंब होने पर न्यायालय को विलंब माफ करने का अधिकार है। अर्थात अपील की कुल अवधि 180 दिनों की है। सवाल यह उठा कि यदि इन 180 दिनों में अपील दाखिल नहीं की जा सकी तो वह व्यक्ति जिसके खिलाफ आदेश हुआ उसके पास क्या विकल्प बचता है। क्या उसका न्याय पाने का अवसर समाप्त हो जाएगा। याचिका पर वरिष्ठ अधिवक्ता रविकिरन जैन, राजीव लोचन शुक्ला, विष्णु बिहारी तिवारी और राज्य सरकार की ओर से अपर महाधिवक्ता मनीष गोयल, अपर सॉलीसिटर जनरल ज्ञान प्रकाश सिंह ने पक्ष रखा।