डिबार किए जाएं गलत सवाल बनाने वाले विशेषज्ञ
0 पीसीएस प्रारंभिक परीक्षा-2017
0 प्रतियोगियों ने यूपीपीएससी के सचिव को दिया ज्ञापन, गिनाईं कई खामियां
0 गलत सवाल हटाकर बचे हुए प्रश्नों के आधार पर ही मेरिट बनाने की मांग
अमर उजाला ब्यूरो
इलाहाबाद।
पीसीएस प्रारंभिक परीक्षा-2017 में गलत सवाल पूछे जाने के बाद उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (यूपीपीएससी) की कार्यप्रणाली फिर संदेह के घेरे में आ गई है। प्रतियोगियों ने आयोग के सचिव को ज्ञापन भेजकर कई गंभीर सवाल उठाए हैं। साथ ही आयोग की कार्यप्रणाली को पारदर्शी बनाने के लिए सचिव के समक्ष कुछ मांगें भी रखी हैं। प्रतियोगियों की पहली मांग तो यही है कि जिन विशेषज्ञों ने पीसीएस प्रारंभिक परीक्षा के पेपर में गलत सवाल शामिल किए, उन्हें आयोग की ओर से हमेशा के लिए डिबार कर दिया जाए।
प्रतियोगी छात्र संघर्ष समिति की ओर से सचिव को दिए गए ज्ञापन में कहा गया है कि गलत सवालों को लेकर प्रतियोगियों की ओर से दर्ज कराई जा रहीं आपत्तियों के निस्तारण के लिए अलग से विशेषज्ञों की कमेटी बनाई जाए और उसमें पुराने विशेषज्ञ शामिल न किए जाएं। साथ ही जिस प्रतियोगी ने आपत्ति दी है, उसे मोबाइल और ई-मेल पर सूचित किया जाए कि उसकी ओर से दर्ज कराई गई आपत्ति का क्या हुआ और संबंधित मामले में आयोग ने किस साक्ष्य को सही माना ताकि भविष्य में उसी आधार पर आपत्तियों का निस्तारण हो सके। साथ ही प्रतियोगी छात्रों की ओर से दिए गए साक्ष्यों को ध्यान में रखकर विषय विशेषज्ञों को आपत्तियों का निस्तारण करने का निर्देश दिया जाए।
प्रतियोगियों की ओर से सबसे महत्वपूर्ण मांग की गई है कि आपत्तियों के निस्तारण के बाद जो सवाल गलत हों, उन्हें बाहर कर बाकी प्रश्नों के आधार पर ही मेरिट बनाई जाए। मसलन, सामान्य अध्ययन द्वितीय प्रश्नपत्र में 150 में से अगर 10 सवाल गलत हैं तो 140 प्रश्नों पर ही मेरिट बनाई जाए। प्रतियोगियों का कहना है कि मेरिट बनाते वक्त किसी सांख्यिकीय फार्मूले का प्रयोग न किया जाए, क्योंकि प्रारंभिक परीक्षा में दशमलव अंकों के अंत से प्रतियोगी सफल और असफल होते हैं। ऐसे में सवालों को हटाने के बाद साख्यिकीय फार्मूले की जगह न्यायसंगत प्रणाली अपनाई जाए। समिति के मीडिया प्रभारी अवनीश पांडेय का कहना है कि आयोग ने सुधार की कवायद शुरू की है, लेकिन अब भी बहुत सी खामियां हैं। उन्हें उम्मीद है कि आयोग के अफसर प्रतियोगियों की मांगें पूरी करेंगे। वहीं, आयोग के सचिव जगदीश का कहना है कि नियमों के तहत जो भी होगा, प्रतियोगियों के हित में किया जाएगा।