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गंगा पूजन, दुग्धाभिषेक के बाद
मांगा दादी जैसा बनने का आशीष
0 त्रिवेणी बांध स्थित बड़े हनुमान मंदिर में प्रियंका गांधी ने किया पूजन-अर्चन
0 अक्षयवट का भी दर्शन किया, मोटरबोट छोड़कर सामान्य नाव से पहुंचीं अरैल
मुनेंद्र वाजपेयी
प्रयागराज। कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने सोमवार को संगम तट से चुनावी अभियान शुरू किया। सबसे पहले उन्होंने बड़े हनुमानजी के दर्शन-पूजन किए और दादी जैसा बनने का आशीष मांगा। इसके बाद अक्षयवट के दर्शन भी किए। प्रियंका ने संगम नोज पर गंगा पूजन कर दुग्धाभिषेक किया और माथे पर जल लगाकर नमन किया। यहां से स्टीमर छोड़कर सामान्य नाव से वह नदी पार कर अरैल पहुंचीं। यहां से वह मनैया के लिए सड़क मार्ग से निकलीं।
सोमवार सुबह स्वराज भवन से करीब साढ़े नौ बजे निकलीं प्रियंका पहले बड़े हनुमान मंदिर पहुंचीं। वहां महंत नरेंद्र गिरि और आनंद गिरि ने दर्शन-पूजन के साथ आरती उतरवाई। महंतों का आशीर्वाद लेकर उन्होंने अक्षयवट का दर्शन किया। इस दौरान संगम इलाका छावनी बना रहा। एसपीजी के साथ एसपी सिटी, महिला पुलिस, डॉग स्क्वायड आदि की सक्रियता बनी रही। दस बजे के बाद काफिले से संगम नोज पहुंचीं प्रियंका ने गंगा को प्रणाम करते हुए जलाभिषेक और दुग्धाभिषेक किया। इससे पहले वहां जुटे कांग्रेसी नेताओं ने गंगा भजन गाए और प्रियंका जिंदाबाद के नारे लगाए। दस मिनट के इस कार्यक्रम की कमान विधायक अराधना तिवारी मोना के हाथ रहीं। यहां कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष राज बब्बर समेत कई नेता मौजूद रहे।
उत्साही कार्यकर्ताओं के स्वागत और नारेबाजी के बीच घाट पर पैदल निकलीं प्रियंका तय रणनीति के मुताबिक स्टीमर से नहीं सामान्य चप्पू वाली नाव पर सवार होने पहुंचीं। घाट पर बतौर प्रभारी तैनात पाटी के वरिष्ठ नेता पार्षद मुकुंद ने उन्हें अपना परिचय देकर उन्हें उनकी नाव तक पहुंचाया। एसपीजी घेरे में प्रियंका मोना और कुछ महिला कांग्रेसियों के साथ नाव पर सवार हुईं। चार अन्य नावों पर एसपीजी के जवान और अन्य नेता सवार हुए। नाव से वह अरैल पहुंचीं और वहां से वह सड़क मार्ग से मनैया के लिए निकलीं।
घाट पर सामान ही नहीं सहानुभूति भी बटोरी...
संगम नोज पर सोमवार को गंगा पूजन के बाद नाव पर सवार होने जा रहीं प्रियंका गांधी ने डिब्बे, माला, फूल, नारियल आदि को पैरों से रौंद रही भीड़ को न केवल रोका, बल्कि वह वहां रुकीं। प्रियंका के रुकते ही भीड़ में शामिल लोगों के पांव थम गए। प्रियंका वहां बैठीं और नैनी की नेहा कुमारी को ढांढस बंधाया। पूछा नुकसान तो नहीं हुआ। अपने सामने प्रियंका को पाकर वह चकित थी। नेहा के मुंह से बोल नहीं फूट रहे थे, उसने सिर्फ सिर हिलाया और उधर उसका बिखरा सामान समेटकर प्रियंका ने सहानुभूति बटोरी।