हाईकोर्ट बार चुनाव
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एल्डर कमेटी के खिलाफ कोर्ट पहुंची कार्यकारिणी
0 बढ़ी रार, पावर सीज करने के निर्णय को चुनौती
अमर उजाला ब्यूरो
प्रयागराज। हाईकोर्ट बार चुनाव से पहले एल्डर कमेटी और निवर्तमान कार्यकारिणी में रार बढ़ गई है। कार्यकाल नहीं बढ़ाने के खिलाफ कार्यकारिणी ने चेयरमैन एल्डर कमेटी के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। इसे लेकर हाईकोर्ट में जनहित याचिका भी दाखिल की गई है। शुक्रवार को याचिकाकर्ता सुनीता शर्मा के वकील विजय चंद्र श्रीवास्तव और बार के महासचिव एसी तिवारी ने चीफ जस्टिस कोर्ट में मेंशन कर याचिका पर सुनवाई करने की मांग भी की थी। हालांकि, चीफ जस्टिस ने इसे अस्वीकार करते हुए 16 जनवरी को प्रस्तुत करने के लिए कहा है।
निवर्तमान अध्यक्ष आईके चतुर्वेदी का कहना है कि एल्डर कमेटी ने अपने अधिकारों से बाहर जाकर काम किया है। आज तक इतिहास में ऐसा कभी नहीं हुआ है कि नई कार्यकारिणी के गठन से पूर्व ही कार्यरत कार्यकारिणी को काम करने से रोक दिया जाए। चेयरमैन एल्डर कमेटी ने कार्यकारिणी के वित्तीय अधिकार भी सीज कर दिए हैं, जिससे अधिवक्ता हित के तमाम कार्य रुक गए हैं। इतना ही नहीं एचजेएस परीक्षा में शामिल होने वाले वकीलों को अनुभव प्रमाणपत्र भी नहीं दिया जा सका, क्योंकि महानिबंधक कार्यालय में अध्यक्ष और महासचिव का हस्ताक्षर ही पंजीकृत है। महानिबंधक कार्यालय चेयरमैन द्वारा जारी प्रमाणपत्र स्वीकार नहीं कर रहा है। निवर्तमान अध्यक्ष का यह भी आरोप है कि एल्डर कमेटी मैन्युअल मतगणना सिर्फ दिन में कराएगी, जिससे चुनाव परिणाम आने में महीनों लग जाएगा। इससे चेयरमैन की लंबे समय तक पावर में बने रहने की मंशा है।
इसके जवाब में चेयरमैन वीसी मिश्र का कहना है कि उन्होंने किसी की पावर सीज नहीं की है। बार एसोसिएशन के नियमों के अनुसार कार्यकाल समाप्त होने के बाद कार्यकारिणी का कार्यकाल सिर्फ एक माह के लिए बढ़ाया जा सकता है। सचिव ने एल्डर कमेटी को जो पत्र दिया था उसमें सिर्फ कार्यकाल समाप्त होने और आगे की व्यवस्था करने के लिए कहा गया। कार्यकाल बढ़ाने की मांग नहीं की गई है। हमने कार्यकारिणी को वेतन निर्गत करने का वित्तीय अधिकार दिया था। अन्य खर्च भी एल्डर कमेटी की अनुमति से कर सकते हैं, मगर उनको पूरा अधिकार चाहिए जो गलत है। जहां तक चुनाव में मैन्युअल मतगणना का सवाल है तो ऐसा कराना उचित है, क्योंकि रात की मतगणना में उपद्रव होता था। पूर्व में बैलेट पेपर पर न नंबर होता था और न किसी का दस्तखत। कंप्यूटर काउंटिंग में डिवाइस लगाकर धांधली की शिकायत मिली है। बार में नियुक्तियों और धांधली की जांच कराने से भी निवर्तमान कार्यकारिणी परेशान है।