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कॉलेजों में बायोमैट्रिक सिस्टम अनिवार्य नहीं

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प्रबंधकीय कॉलेजों में बायोमैट्रिक सिस्टम अनिवार्य नहीं
विधानसभा में उठे सवाल पर शिक्षा मंत्री ने दिया जवाब
कुछ प्रबंधकीय महाविद्यालयों में लागू व्यवस्था पर आपत्ति

अमर उजाला ब्यूरो
इलाहाबाद।
प्रदेश के प्रबंधकीय महाविद्यालयों में बायोमैट्रिक सिस्टम अनिवार्य नहीं है। उच्च शिक्षा मंत्री डॉ. दिनेश शर्मा ने खुद इस बाबत स्थिति स्पष्ट की है। वहीं, प्रदेश के कुछ प्रबंधकीय कॉलेजों में बायोमैट्रिक सिस्टम को अनिवार्य कर दिया गया है और यह भी कहा गया है कि वहां बायोमैटिक सिस्टम के तहत हाजिरी नहीं ली जाती है तो वेतन भी जारी नहीं किया जाएगा।
उच्च शिक्षा की संयुक्त निदेशक डॉ. उर्मिला सिंह की ओर से मार्च में ही सभी शासकीय एवं प्रबंधकीय महाविद्यालयों को पत्र जारी कर वहां बायोमैट्रिक सिस्टम लगाए जाने का निर्देश दिया गया था। यह भी कहा गया था कि सभी कॉलेज में बायोमैट्रिक सिस्टम लगाना अनिवार्य है, जबकि प्रबंधकीय महाविद्यालयों के शिक्षकों का दावा था कि यह आदेश केवल शासकीय महाविद्यालयों के लिए है। 10 जुलाई को आगरा-अलीगढ़ परिक्षेत्र के क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारी की ओर से सभी शासकीय एवं प्रबंधकीय कॉलेजों के प्राचार्यों को आदेश कर वहां बायोमैट्रिक सिस्टम अनिवार्य कर दिया गया और आदेश में यह भी कहा गया कि अगर बायोमैटिक सिस्टम से हाजिरी नहीं ली गई तो वेतन भी नहीं दिया जाएगा।
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शिक्षकों को आपत्ति इस बात पर है कि उनसे कई दूसरे कार्य भी लिए जाते हैं जबकि आदेश में कहा गया कि कॉलेज में निर्धारित समय तक उपस्थिति के अलावा शिक्षक अन्य कार्य भी पूर्व की भांति करते रहेंगे। शिक्षकों की ओर से विधायक हरगोविंद भार्गव ने यह मामला विधानसभा में उठाया और पूछा कि क्या डिग्री स्तर पर शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार के लिए प्रबंधकीय महाविद्यालयों में बायोमैट्रिक सिस्टम अनिवार्य कर दिया गया है। इस पर उच्च शिक्षा मंत्री एवं उप मुख्यमंत्री डॉ. दिनेश शर्मा की ओर से जवाब दिया गया कि प्रबंधकीय महाविद्यालयों में बायोमैट्रिक सिस्टम लगाए जाने पर कोई निर्णय नहीं लिया गया है। आल इंडिया फेडरेशन ऑफ यूनिवर्सिटी एंड कॉलेज टीचर्स ऑर्गनाइजेशन के जोनल सचिव डॉ. आरसी मिश्र का कहना है कि उच्च शिक्षा मंत्री की ओर से स्थिति स्पष्ट किए जाने के बाद अब शिक्षा निदेशालय की ओर से जारी आदेश पर ही सवाल उठ रहे हैं।
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