हाईकोर्ट की रोक के बाद भी दे दिए पट्टे
बिना ई टेंडरिंग खनन पट्टा देने पर सीबीआई, प्रमुख सचिव से जवाब तलब
अमर उजाला ब्यूरो
इलाहाबाद।
हाईकोर्ट के स्पष्ट निर्देश के बावजूद मिर्जापुर जिला प्रशासन और खनन विभाग के अफसरों द्वारा खनन पट्टे देने पर हाईकोर्ट ने जवाब तलब किया है। कोर्ट ने प्रमुख सचिव खनन और मिर्जापुर के खनन विभाग के अफसरों से जवाब मांगा है। अवैध खनन के मामले की जांच सीबीआई कर रही है इसलिए कोर्ट ने सीबीआई को भी नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। पारस नाथ यादव की जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश मुख्य न्यायमूर्ति डीबी भोसले और न्यायमूर्ति एमके गुप्ता की पीठ ने दिया है।
याची के अधिवक्ता बृजेश प्रताप सिंह ने कोर्ट को बताया कि 31 मई 2012 को प्रदेश सरकार ने शासनादेश जारी कर निर्णय लिया था कि मिट्टी, पत्थर, बालू, बोल्डर आदि के खनन हेतु पट्टे सिर्फ ई- टेंडरिंग के जरिए ही दिए जाएंगे। इस बीच हाईकोर्ट में दाखिल जनहित अमर सिंह बनाम राज्य में हाईकोर्ट ने आदेश दिया कि 31 मई 2012 के बाद कोई खनन पट्टा जारी न किया जाए और न ही पुराने पट्टे का नवीनीकरण होगा।
इस दौरान 2009 से लेकर 2013 के खनन पट्टों के लिए प्राप्त होने वाले आवेदनों को यह कहकर रोके रखा गया कि पांच हेक्टेयर के पट्टे तैयार करने के बाद इनका निष्पादन किया जाएगा। बाद में इन आवेदनों को चार अगस्त 2014 को यह करते हुए खारिज कर दिया कि आवेदनों में पांच हेक्टेयर से कम क्षेत्रफल के पट्टे मांगे गए हैं। इसके बाद 15 नवंबर 2014 को नया विज्ञापन जारी कर बिना ई टेंडरिंग के ही पुरानी नियमावली के तहत में 127 पट्टों का आवंटन कर दिया। ये सभी पट्टे पांच हेक्टेयर से कम थे। याचिका में मांग की गई है कि गलत तरीके से जारी पट्टों को निरस्त कर रिकवरी की जाए तथा अधिकारियों की भूमिका की जांच कर उन पर कार्रवाई की जाए। मामले की अगली सुनवाई 16 अगस्त होगी।