आठ लाख दुकानों, फर्मों के बदल जाएंगे बोर्ड
जीएसटी लागू होने पर फर्म, दुकान के नाम के साथ जीएसटीएन नंबर लिखना होगा अनिवार्य
सर्टिफिकेट का भी करना होगा डिस्प्ले, इससे पंजीकृत, अपंजीकृत की हो सकेगी पहचान
अमर उजाला ब्यूरो
इलाहाबाद।
एक जुलाई से गुड्स एंड सर्विस टैक्स (जीएसटी) लागू होने के बाद प्रदेश में पंजीकृत तकरीबन आठ लाख दुकानों, फर्मों के बोर्ड भी बदल जाएंगे। इस प्रावधान के तहत हर पंजीकृत व्यापारी को अपनी दुकान, फर्म, कार्यालय में लगाए गए नाम के बोर्ड पर पंजीकरण नंबर यानी जीएसटीएन लिखना अनिवार्य होगा। यह नंबर उन सभी स्थानों पर लिखना होगा, जहां-जहां से व्यापार किया जा रहा है, जैसे दुकान, फैक्ट्री, गोदाम आदि।
वाणिज्य कर विभाग में रजिस्टर्ड तकरीबन आठ लाख व्यापारियों को विभाग से टिन आवंटित है, लेकिन ज्यादातर दुकानों, फर्म, कार्यालयों के बोर्ड पर टिन नंबर नहीं लिखा होता है, लेकिन जीएसटी में ऐसा नहीं होगा। जीएसटीएन का डिस्प्ले न होने पर कार्रवाई का भी प्रावधान है। माना जा रहा है कि जीएसटी लागू होते ही दुकान, कार्यालय, फर्म आदि के बोर्ड बदले हुए नजर आएंगे। जीएसटी में यह भी प्रावधान किया गया है कि दुकान, कार्यालय, फर्म आदि में जीएसटी पंजीकरण सर्टिफिकेट का भी डिस्प्ले करना होगा।
ऐसा होने से पंजीकृत और अपंजीकृत व्यापारियों की पहचान हो सकेगी। साथ ही अफसरों को टैक्स वसूली में सुविधा मिल सके। इससे यह भी पता चल सकेगा कि माल पंजीकृत व्यापारी से खरीदा जा रहा है या अपंजीकृत से, क्योंकि पंजीकृत व्यापारी से माल खरीदने पर अदा किया गए टैक्स पर इनपुट टैक्स क्रेडिट मिलेगा, जबकि अपंजीकृत व्यापारियों से माल खरीदने पर रिवर्स चार्ज में टैक्स जमा करना होगा।
व्यापारियों को मिलेगी रेटिंग
इलाहाबाद (ब्यूरो)। जीएसटी में व्यापारियों को रेटिंग मिलेगी। इससे कम्पलायंस रेटिंग सिस्टम नाम दिया गया है। इसके तहत अच्छे और खराब व्यापारियों की पहचान हो सकेगी। यह रेटिंग टैक्स कम्पलायंस के आधार पर होगी। व्यापारी समय से टैक्स जमा करने के साथ रिटर्न दाखिल करता है और कर संग्रह में सहयोग करता है तो उसे ज्यादा रेटिंग मिलेगी। यह रेटिंग जीएसटी कॉमन पोर्टल पर प्रदर्शित होगी। इसका फायदा यह होगा कि खरीद करने वाले व्यापारी माल बेचने वाले की रेटिंग देखकर यह तय कर सकेंगे कि उसे संबंधित व्यापारी से माल लेना है या नहीं।