प्रयागराज से टिकट बिक्री के आंकड़ों पर गौर करें तो पहली ट्रेन शुक्रवार सुबह 7.20 पर रवाना हुई। 12 कोच की इस ट्रेन में महज पांच यात्रियों ने टिकट खरीदे। इसके बाद दूसरी ट्रेन सुबह 11 बजे रवाना हुई। इस ट्रेन के लिए मात्र 19 टिकट बिके। हालांकि वाराणसी मंडल के पीआरओ अशोक कुमार का कहना है कि स्पेशल ट्रेन में प्रयागराज से बनारस के बीच वाले स्टेशनों से भी टिकट बिके हैं। वहीं उत्तर मध्य रेलवे और उत्तर रेलवे की बात करें तो दोनों जोनल रेलवे द्वारा एक भी स्पेशल ट्रेन का संचालन नहीं किया गया।
एनसीआर के पीआरओ अमित सिंह का कहना है कि भीड़ के हिसाब से ही स्पेशल ट्रेन चलाने की योजना था। पौष पूर्णिमा पर सामान्य दिनों जैसी ही चहल पहल होने की वजह से स्पेशल ट्रेन चलाने की नौबत नहीं आई।
अमावस्या छोड़ अन्य स्नान पर्वों पर नहीं रहती भीड़
पिछले कुछ माघ मेलों पर नजर डाले तो मौनी अमावस्या के मौके पर ही श्रद्धालुओं की सर्वाधिक भीड़ उमड़ती है। अन्य स्नान पर्व पर अमूमन सामान्य दिनों जैसे ही हालात रहते हैं। इसके बावजूद प्रयागराज जंक्शन पर रेलवे तमाम बंदिशें लगा देता है। पौष पूर्णिमा पर सिविल लाइंस साइड में नो इंट्री की वजह से यात्रियों को खासी परेशानी हुई। तमाम यात्रियों में इस बात को लेकर नाराजगी थी कि जब भीड़ ही नहीं है तो सिविल लाइंस साइड से रास्ता क्यों बंद किया गया।
ऐसे में यात्रियों को लंबा चक्कर लगाना पड़ा। बुजुर्ग और बीमार यात्रियों को भी प्लेटफार्म नंबर सात, आठ, नौ एवं दस पर उतरने के बाद सिटी साइड आने के लिए आधा किमी से ज्यादा का सफर करना पड़ा। इसका कुलियों ने भी जमकर फायदा उठाया। यात्रियों से उन्होंने मनमाना पैसा वसूला। डीआरयूसीसी सदस्य पवन श्रीवास्तव का कहना है कि रेलवे बेवजह यात्रियों को परेशान न करें। आगे के स्नान पर्व पर अगर भीड़ नहीं रहती है तो यात्रियों को सिविल लाइंस साइड से प्रवेश के लिए न रोका जाए।