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पढ़े-लिखों के हाथ में शहर की सता

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पढ़े-लिखों के हाथों में शहर की सत्ता
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सर्वाधिक 29 फीसदी पार्षद हैं स्नातक
10 फीसदी ने की परास्नातक की पढ़ाई
तीन पार्षद निरक्षर, आठ फीसदी प्राइमरी तक पढ़े

अमर उजाला ब्यूरो
इलाहाबाद।
नगर निगम चुनाव का शुक्रवार को परिणाम घोषित होने के बाद साफ हो गया है कि शहर की जनता ने इस बार पढ़े-लिखे प्रत्याशियों को तरजीह दी और उन्हें अपना पार्षद चुना। शहर की सत्ता अब पढ़े-लिखे पार्षदों के हाथों में आ गई है। ऐसे में आने वाले दिनों में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। नगर निगम के निर्वाचित 80 पार्षदों में 29 फीसदी स्नातक हैं जबकि 10 फीसदी ने परास्नातक तक की पढ़ाई पूरी की है। दस फीसदी पार्षद प्राइमरी तक पढ़े हैं जबकि तीन पार्षद निरक्षर हैं।
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नगर निगम चुनाव में सर्वाधिक 23 पार्षद ऐसे चुने गए हैं, जिन्होंने स्नातक तक की पढ़ाई की है। इसके अलावा दस पार्षदों ने परास्नातक तक की पढ़ाई की है। केवल तीन पार्षद हैं, जो निरक्षर हैं। तीनों ही महिला पार्षद हैं। इसके अलावा दो पार्षदों के पास डिप्लोमा है, जबकि सात पार्षदों ने जूनियर हाईस्कूल तक की पढ़ाई की है। इसके अलावा छह पार्षद हाईस्कूल और 18 पार्षद इंटरमीडिएट उत्तीर्ण हैं जबकि आठ पार्षद केवल प्राइमरी तक पढ़े हैं। कम पढ़े-लिखे पार्षदों की संख्या भी कम है। इस बार मिनी सदन में 64 फीसदी पार्षद ऐसे होंगे, जिन्होंने इंटरमीडिएट या उससे ऊपर तक की पढ़ाई की है और यह संख्या आने वाले समय में बड़े बदलाव के संकेत दे रही है। परास्नातक तक की पढ़ाई करने वालों में 17 पुरुष और छह महिलाएं शामिल हैं जबकि स्नातक की पढ़ाई करने वाले पार्षदों में चार पुरुष एवं चार महिलाएं हैं। वहीं, इंटरमीडिएट उत्तीर्ण 18 पार्षदों में 15 पुरुष और तीन महिलाएं हैं।
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