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जीएसटी की मार से दवाओं की किल्लत

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जीएसटी की मार से दवाओं की किल्लत
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0 होलसेल में भरमार फुटकर में दवाओं का टोटा
0 जरूरी दवाओं के लिए भटक रहे मरीज, तीमारदार
अमर उजाला ब्यूरो
इलाहाबाद। जीएसटी में दवाओं पर कर के बारे में भ्रम की स्थिति बनी है। थोक बाजार में दवाओं का स्टॉक भरा पड़ा है, लेकिन फुटकर दवा विक्रेताओं ने दवाओं की खरीद सीमित कर दी है। इससे नई कर प्रणाली लागू होने से 15 दिन पहले ही दवाओं की किल्लत हो गई है। शूगर, बीपी की दवाओं तक के लिए मरीजों और तीमारदारों को भटकना पड़ रहा है। अभी से यह स्थिति है तो जीएसटी लागू होने के बाद दवाओं की उपलब्धता पर असर पड़ना तय है।
शहर में बालसन, कमला नेहरू, एसआरएन, कॉल्विन अस्पताल के पास, कीडगंज, बाई का बाग, बैरहना, तेलियरगंज आदि मोहल्लों में फुटकर दवा की दुकानों में रोजमर्रा के इस्तेमाल में आने वाली दवाओं की किल्लत बनी है। शूगरमेट और निकार्डिया जैसी प्रचलित दवाओं के लिए मरीज परेशान हैं। जीवन रक्षक दवाएं नहीं मिल रही हैं। एल्बुमिन जैसे इंजेक्शन ब्लैक में मिल रहे हैं। दवा की दुकानों की चेन चलाने वाली कंपनियों के स्टोर में भी जरूरी दवाओं की अनुपलब्धता है। फुटकर में जरूरी दवाओं का स्टाक कम होने से मरीजों को एक दवा के लिए कई दुकानों पर भटकना पड़ रहा है। मधुमेह से पीड़ित राकेश के मुताबिक अब उन्हें 15 दिन की दवा खरीदने के लिए चार मेडिकल स्टोरों के चक्कर लगाने पड़े। गले में संक्रमण का इलाज करा रही गौरी को डॉक्टर के पर्चे पर लिखा एंटीऑक्सीडेंट का कैप्सूल नहीं मिल रहा है।
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दवाओं के लिए अभी तक दो कर दरें लागू हैं। सभी तरह की दवाओं पर 5 और फूड सप्लीमेंट पर 12 प्रतिशत का कर वसूला जा रहा है। अब जीएसटी में दवाओं पर पांच तरह की दरें प्रस्तावित हैं। कर मामलों के जानकार महेंद्र गोयल के मुताबिक जीएसटी में इंसुलिन और कुछ जीवन रक्षक दवाओं पर 5 प्रतिशत, सिरप आदि पर 12 प्रतिशत, मेडिकेटेड पेस्ट, मल्टी विटामिन व अन्य दवाओं पर 28 प्रतिशत, फूड सप्लीमेंट पर 12 प्रतिशत और कुछ अन्य दवाओं पर 18 प्रतिशत की कर दर प्रस्तावित है। उन्होंने बताया कि किस स्लैब में कौन सी दवाएं होंगी, इसको लेकर भ्रम की स्थिति बनी है।
इलाहाबाद केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट एसोसिएशन के महामंत्री परमजीत सिंह के मुताबिक जीएसटी में दवाओं की कर दर को लेकर भ्रम की स्थिति है। इससे दवाओं की बिक्री पर असर पड़ा है। कंपनी, सीएंडएफ या डिस्ट्रीब्यूटर से दवा खरीदने वाले थोक विक्रेताओं को वैट का डिफरेंस लौटाने का पत्र दवा कंपनियों की ओर से आ गया है। जहां कहीं दिक्कत है वे कंपनियां क्रेडिट नोट देने या पहले बिक्री की गईं दवाएं वापस लेने को तैयार हैं। वहीं कंपनियों ने दवा निर्माण की मात्रा भी कुछ कम कर दी है। उन्होंने बताया कि थोक दवा विक्रेताओं के पास पर्याप्त मात्रा में दवाएं उपलब्ध हैं।
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दवाओं के थोक मंडी लीडर रोड पर इन दिनों पहले की अपेक्षा सन्नाटा पसरा है। केमिस्ट अब पहले के मुकाबले एक चौथाई ही दवा की खरीद कर रहे हैं। इस कारण थोक दवा मंडी में बिक्री लगभग आधी हो गई है। केमिस्ट जरूरी दवाओं की खरीद अब डिब्बों में पत्तों में कर रहे हैं। उन्हें अंदेशा है कि एक जुलाई के बाद दवाओं के दाम बढ़े या घटे तो उसकी भरपाई नहीं हो पाएगी। फुटकर दवा विक्रेताओं को जीएसटी लागू होने के बाद मूल्य में आने वाला अंतर वापस करने के बारे में स्पष्ट नीति या निर्णय नहीं लिया गया है।
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जीएसटी में दवाओं की प्रस्तावित दरें
0 इंसुलिन, अन्य जीवनरक्षक इंजेक्शन, दवाएं- 5 प्रतिशत
0 सिरप आदि दवाएं- 12 प्रतिशत
0 फूड सप्लीमेंट आदि- 12 प्रतिशत
0 कुछ अन्य दवाएं- 18 प्रतिशत
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इन दवाओं की है किल्लत
0 एल्बुमिन इंजेक्शन
0 इंजेक्शन वोवरॉन, डेकाडान, डेक्सोना, रैबीपुर, पेन्यूमो-23
0 हेपेटाइटिस, चिकनपॉक्स, डिप्थीरिया की वैक्सीन
0 कैंसर के इंजेक्शन आदि
0 निकार्डिया, शूगरमेट
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