गाजियाबाद के ध्यानार्थ
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मानवाधिकार आयोग को रिपोर्ट
देने के लिए बाध्य है सरकार
प्रयागराज। हाईकोर्ट ने कहा है कि मानवाधिकारों का प्रवर्तन लोगों की स्वतंत्रता और जीवन की रक्षा के लिए किया गया है, इसलिए सरकार मानवाधिकार आयोग द्वारा किसी मामले में मांगी गई रिपोर्ट देने के लिए बाध्य है। आयोग को सरकार यह कहते हुए रिपोर्ट देने से इंकार नहीं कर सकती कि आयोग की भूमिका सिर्फ सुझाव या सलाह देने भर की है। प्रदेश सरकार की याचिका खारिज करते हुए यह आदेश न्यायमूर्ति अभिनव उपाध्याय और न्यायमूर्ति डा. वाईके श्रीवास्तव की पीठ ने दिया है।
मामले के अनुसार गाजियाबाद में 30 मार्च 2010 को शमीम नामक युवक की हत्या के मामले में मानवाधिकार आयोग को एसएसपी गाजियाबाद से सूचना प्राप्त हुई। आयोग ने डीजीपी यूपी को मामले की निष्पक्ष जांच करने और रिपोर्ट आयोग को प्रेषित करने का निर्देश दिया था। प्रदेश सरकार की ओर से आयोग के इस निर्देश को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई। कहा गया कि आयोग को सेक्शन 18 के तहत राज्य सरकार से सिर्फ संस्तुति का अधिकार है। वह रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश नहीं दे सकता है। कोर्ट ने इस दलील को स्वीकार करने से इंकार करते हुए कहा कि आयोग को संस्तुति के साथ ही रिपोर्ट मांगने का भी अधिकार है।