विधि छात्रों के बार-बार याचिकाएं करने से हाईकोर्ट नाखुश
0 याचिकाएं दाखिल करने के बजाए पढ़ाई पर ध्यान देने की दी नसीहत
अमर उजाला ब्यूरो
इलाहाबाद। हाईकोर्ट ने विधि छात्रों द्वारा बार-बार जनहित याचिकाएं दाखिल करने पर नाखुशी जाहिर की है। कोर्ट ने छात्रों को नसीहत दी कि वे याचिकाएं दाखिल करने के बजाए, अभी अपनी पढ़ाई पर ध्यान दें। ह्यूमन राइट लॉ नेटवर्क से जुड़े सिद्रा अहमद और 11 अन्य विधि छात्रों की ओर से दाखिल याचिका पर मुख्य न्यायमूर्ति डीबी भोसले और न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा की पीठ सुनवाई कर रही है। कोर्ट ने अगली सुनवाई पर छात्रों को निर्देशित करने वाले अधिवक्ता केके रॉय को भी हाजिर रहने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने कहा कि हाईकोर्ट में प्रैक्टिस करने वाले वकीलों को छात्रों को आगे न करके स्वयं आगे आना चाहिए।
याचिका पर बहस करने के लिए इन पर्सन (बिना किसी वकील की मदद के स्वयं) उपस्थित हुए छात्रों को देखने के बाद अदालत ने कहा कि पिछले कुछ माह के भीतर इन छात्रों की यह तीसरी जनहित याचिका है, जबकि छात्रों के एक अन्य समूह ने भी याचिकाएं दाखिल की हैं। याची छात्रों ने कोर्ट को बताया कि जनहित याचिकाएं दाखिल करना उनके पाठ्यक्रम का हिस्सा है। छात्रों ने कहा कि अधिवक्ता केके रॉय ने उनको यह याचिका दाखिल करने के लिए प्रेरित किया है। कोर्ट का कहना था कि केके रॉय इसी कोर्ट में प्रैक्टिस करते हैं। यह बात समझ से परे है कि वह स्वयं याचिका पर बहस करने के लिए क्यों नहीं आते हैं। कोर्ट का कहना था कि किसी अधिवक्ता के चाहने पर हम विधि प्रथम वर्ष के छात्रों को इस प्रकार की याचिका दाखिल करने के लिए प्रोत्साहित नहीं करेंगे, चाहे वह किसी भी विषय पर हो। छात्रों से अपेक्षा की जाती है कि वह अपना ध्यान पढ़ाई में लगाएं न कि याचिकाएं दाखिल करने पर। कोर्ट ने सात अगस्त को याचिका पर सुनवाई के समय अधिवक्ता केके रॉय को भी साथ लाने का याची छात्रों को निर्देश दिया है।