इविवि में अब राष्ट्रीय सुरक्षा पर उच्च स्तरीय शोध
यूजीसी ने राष्ट्रीय सुरक्षा केंद्र खोलने के लिए दी मंजूरी
21 लाख रुपये हुए स्वीकृत, दो किस्तों में मिलेगी रकम
अमर उजाला ब्यूरो
इलाहाबाद।
एनआईआरएफ रैंकिंग में टॉप-100 विश्वविद्यालयों की सूची से बाहर होने के बाद इलाहाबाद विश्वविद्यालय (इविवि) प्रशासन को मिली एक उपलब्धि ने अफसरों को राहत की सांस लेने का मौका दिया है। इविवि में अब राष्ट्रीय सुरक्षा को लेकर उच्च स्तरीय शोध किए जा सकेंगे। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने इविवि के रक्षा अध्ययन विभाग में राष्ट्रीय सुरक्षा केंद्र खोले जाने की अनुमति प्रदान कर दी है। इसके लिए 21 लाख रुपये स्वीकृत किए गए है, जिसका भुगतान दो किस्तों में किया जाएगा। खास यह है कि इसके लिए अलग से असिस्टेंट प्रोफेसर के दो पद भी स्वीकृत किए गए हैं।
इविवि के रक्षा अध्ययन विभाग में राष्ट्रीय सुरक्षा केंद्र खोले जाने का प्रस्ताव यूजीसी को भेजा गया था। यूजीसी ने इविवि में दो साल के लिए राष्ट्रीय सुरक्षा केंद्र खोले जाने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। इसमें राष्ट्रीय सुरक्षा को लेकर उच्च स्तरीय शोध किए जाएंगे। दो साल के लिए 21 लाख रुपये मंजूर किए गए हैं। दो किस्तों में साढ़े दस-दस लाख रुपये दिए जाएंगे। देश के चार विश्वविद्यालयों में यूजीसी ने इसके लिए मंजूरी दी हैं। इनमें इलाहाबाद समेतपूरा, चंडीगढ़ और चेन्नई विश्वविद्यालय शामिल है। गत चार अप्रैल को हुई कार्य परिषद की बैठक में सदस्यों को इस बारे में जानकारी भी दी गई और इसे विश्वविद्यालय के लिए बड़ी उपलब्धि बताया गया। बताया जा रहा है कि देश के सबसे पुराने रक्षा अध्ययन विभागों में एक इविवि का रक्षा अध्ययन विभाग भी शामिल है और इसी वजह से विभाग को यह उपलब्धि मिली है। इसकी स्थापना वर्ष 1940 में तत्कालीन कुलपति प्रो. एएन झा के कार्यकाल में हुई थी। वर्ष 1965 में इस विभाग में पीजी की पढ़ाई शुरू की गई। वर्तमान में इसके विभागाध्यक्ष प्रो. प्रशांत अग्रवाल हैं।