फर्जी घोषित किए जाने के खिलाफ अदालत पहुंचीं त्रिकाल भवंता
0 अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष नरेंद्र गिरी और सदस्यों के खिलाफ मानहानि का परिवाद दाखिल किया
अमर उजाला ब्यूरो
इलाहाबाद।
परी अखाड़े की प्रमुख त्रिकाल भवंता ने अखाड़ा परिषद के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। फर्जी बाबाओं की सूची में शामिल किए जाने के खिलाफ उन्हें ने अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरी और सदस्यों के खिलाफ मानहानि का परिवाद कोर्ट में दायर कर दिया है। कोर्ट ने परिवाद को दर्ज रजिस्टर करते हुए 17 फरवरी को परिवादी के बयान की तिथि नियत की है।
त्रिकाल भवंता का दावा है कि वह महिला धर्माचार्य और प्रथम महिला शंकराचार्य हैं। हिंदू धर्म के प्रचार-प्रसार तथा महिलाओं की गरिमा स्थापित करने के लिए उन्होंने परी अखाड़े की स्थापना की है, जो कि पंजीकृत संस्था है। इसके माध्यम से वह महिलाओं के धर्म क्षेत्र में प्रवेश और उत्थान के लिए प्रयास रही हैं। त्रिकाल भवंता का कहना है कि स्वयं को शंकराचार्य घोषित करने के कारण तमाम पुरुष संत उनसे ईर्ष्या रखते हैं। इसी के कारण उनके विरुद्ध एक फर्जी प्रस्ताव बनाकर अपंजीकृत संस्था के माध्यम से उनको फर्जी संतों की सूची में डाल दिया गया। इससे संबंधित समाचार अखबारों में प्रकाशित होने के बाद उनको इसकी जानकारी मिली। त्रिकाल भवंता का कहना है कि इस कृत्य उनके और उनके शिष्यों के मान सम्मान को ठेस पहुंची है। उनका अपमान हुआ है। इस मामले पर कोर्ट अब 17 फरवरी को सुनवाई करेगी।