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परंपरा से मैं ज्योतिषपीठाधीयवर हूं वासुदेवानंद

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मैं परंपरा से ज्योतिष्पीठाधीश्वर हूं : स्वामी वासुदेवानंद
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0 किसी शंकराचार्य को दूसरे पीठ का शंकराचार्य तय करने का अधिकार नहीं
0 गुरु को ही शिष्य की योग्यता एवं संन्यास की प्रक्रिया तय करने का अधिकार
अमर उजाला ब्यूरो
इलाहाबाद।
शंकराचार्य तो परंपरा से बनते हैं। मैं परंपरा से ज्योतिष्पीठाधीश्वर हूं। मुझे मेरे गुरु ने इस पद पर बिठाया है। अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद ने भी मुझे ही ज्योतिषपीठ माना है। अलोपीबाग स्थित शंकराचार्य आश्रम में मंगलवार को पत्रकारों से बातचीत के दौरान स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती ने ये बातें कहीं। उन्होंने धर्म और परंपरा की दुहाई देते हुए कहा कि शंकराचार्य का पद गुरु-शिष्य परंपरानुसार तय होता है। किसी भी शंकराचार्य को दूसरे पीठ का शंकराचार्य तय करने का कोई अधिकार नहीं है।
ज्योतिष्पीठ की परंपरा 2500 वर्षों पुरानी है। इसका गौरवशाली इतिहास रहा है। प्राकृतिक आपदा के चलते 165 वर्षों तक पीठ खाली रही। इस दौरान तीन पीठों (द्वारका शारदा, पुरी, शृंगेरी) में से किसी ने भी स्वयं को न तो ज्योतिष्पीठाधीश्वर घोषित किया न ही किसी अन्य को उत्तराधिकारी बनाया। उन्होंने स्पष्ट कहा कि उस समय भारत धर्म महामंडल को ज्योतिष्पीठ के पुनरुद्धार का दायित्व दिया गया था। स्वामी ब्रह्मानंद सरस्वती को शंकराचार्य चुने जाने के बाद से पीठ पर गुरु-शिष्य परंपरा से शंकराचार्य विद्यमान हैं। माघ मेले के दौरान शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती से मुलाकात करने के प्रश्न पर उन्होंने कहा कि ऐसी संभावना नहीं है।
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आराधना महोत्सव 24 से
इलाहाबाद। ब्रह्मलीन शंकराचार्यों की स्मृति में आयोजित होने वाले आराधना महोत्सव की शुरुआत शुक्रवार से हो रही है। अलोपीबाग स्थित शंकराचार्य आश्रम में होने वाले नौ दिवसीय आयोजन में श्रीमद्भागवत का पाठ, रामचरित मानस का नवाह्न पारायण, राधामाधव का वार्षिक पाटोत्सव, गीता जयंती, स्वामी शांतानंद सरस्वती जयंती, सम्मान समारोह आदि आयोजित होंगे। प्रवक्ता ओंकारनाथ त्रिपाठी के मुताबिक कार्यक्रम में देश भर से श्रद्धालु एवं संत महात्मा हिस्सा लेंगे। शुरुआत वेदी रचना, गौरी गणेश पूजन से होगी। स्वामी वासुदेवानंद सरसवती के सानिध्य में सारे आयोजन संपन्न होंगे।
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