थानों में लंबे समय से जमे 179 पुलिसवालों को आखिरकार हटा दिया गया। आईजी ने समीक्षा की तो पाया कि कुछ थानों और चौकियों में जरूरत से ज्यादा पुलिसवाले टिके हैं जबकि कई थानों में जरूरत के बराबर भी पुलिसकर्मियों की तैनाती नहीं है। थानों को चार श्रेणियों में बांटकर आईजी ने नियतन और जरूरत के हिसाब से पुलिसकर्मियों की तैनाती को कहा, जिसके बाद एसएसपी ने यह कार्रवाई की है। अवैध वसूली के चलते कमाई वाले थानों में दोबारा या तीसरी बार पोस्ंिटग कराकर जमे 28 सिपाहियों को भी वहां से हटाकर दूसरे थाने-चौकियों में भेज दिया गया है। थानेदारों को चेतावनी दी गई है कि अगर किसी थाने में कोई सिपाही री-पोस्टिंग पर जमा है या तीन साल से ज्यादा वक्त से तैनात है तो कार्रवाई होगी।
शहर और देहात के तमाम थाने ऐसे हैं जहां जुआ, सट्टा, मालवाहक वाहनों से अवैध वसूली के चलते सिपाही और दरोगा तैनाती कराकर लंबे समय तक टिकने को लालायित रहते हैं। किसी थाने में एक सिपाही लंबे समय तक ही तैनात रह सकता है लेकिन थानेदारों के खास सिपाही तीन साल के बाद भी टिके रहते हैं। शहर के जार्जटाउन, कीडगंज, कर्नलगंज, करेली में ऐसे कई सिपाही बदनाम भी हैं, लेकिन उन पर अफसरों का डंडा ही नहीं चलता। हाल ही में आईजी जोन आरके चतुर्वेदी ने समीक्षा बैठक में कहा कि कई थानों में नियतन से ज्यादा सिपाही और दरोगा और कई थानों में कम। आईजी ने कहा कि थानों को ए, बी, सी, डी श्रेणी में बांटकर पुलिसकर्मियों की तैनात की गड़बड़ी दूर की जाए। आईजी के निर्देश के बाद एसएसपी जोगेंद्र कुमार ने 179 सिपाहियों को एक थाने से दूसरे थाने और चौकी में स्थानांतरित कर दिया। इनमें 28 सिपाही ऐसे थे जिन्होंने उसी थाने में दूसरी या तीसरी बार पोस्टिंग करा ली थी। जबकि 151 सिपाहियों को उन थानों से हटाया गया जहां जरूरत से ज्यादा पुलिसवालों की तैनाती थी। एसएसपी ने यह भी चेतावनी दी है कि किसी थाने में कोई सिपाही दोबारा तैनात हुआ है या तीन साल से ज्यादा समय से टिका है तो थानेदार पर गाज गिरेगी।