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उपनिरीक्षक से बढ़ा वेतन वसूलने का आदेश रद्द

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उपनिरीक्षक से बढ़ा वेतन वसूलने का आदेश रद्द
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प्रयागराज। हाईकोर्ट ने अनुमानित रूप से नियुक्त उपनिरीक्षक के वेतनमान को घटाने तथा अधिक भुगतान की वसूली का आदेश रद्द कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि उपनिरीक्षक को प्रशिक्षण पर न भेज कर उसके अधिकार का हनन किया गया और एक बार जब उसे अनुमानित नियुक्ति (नोशनल) दे दी गई तो फिर वेतनमान कम करने का आदेश औचित्यहीन है। प्रतापगढ़ के उमेशचंद्र पांडेय की याचिका पर यह आदेश न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा ने दिया है।
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याचिका पर अधिवक्ता अनूप त्रिवेदी ने पक्ष रखा। अधिवक्ता का कहना था कि याची सिविल पुलिस की 1987-88 भर्ती में शामिल हुआ और चयनित हो गया। मगर, उसके बैच के अन्य लोगोें की तरह उसे प्रशिक्षण पर नहीं भेजा गया। हाईकोर्ट के आदेश पर उसे 1990 में नोशनल नियुक्ति दी गई। उसे 1880 रुपये की पे स्केल पर रखा गया। 17 अगस्त 2015 और 28 अगस्त 2016 के आदेश से उसका पे स्केल घटाकर 1640 रुपये कर दिया गया और उसे तीन लाख 40 हजार रुपये की वसूली का आदेश भी जारी कर दिया गया। कोर्ट ने कहा कि जब याची की नियुक्ति 27 दिसंबर 1990 को अनुमानित रूप से हुई है तो उसे दिए गए वेतनमान की गणना भी यह ध्यान में रखते हुए करनी होगी कि याची की सेवा की शुरुआत उसी तिथि से हुई है। इसके अलावा कोई और नजरिया रखना याची के अधिकार का हनन होगा और यह अनुमानित नियुक्ति की प्रकृति के भी विपरीत है। कोर्ट ने 17 अगस्त 2015 और 28 अगस्त 2016 के आदेशों को रद्द करते हुए कहा कि याची सभी परिणामी लाभों का हकदार है।
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