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इलाहाबाद जंक्शन के गदहा लाइन का प्लेटफार्म नंबर 4 में होगा विलय, जानिए क्यों पड़ा नाम

Sat, 27 Oct 2018 02:01 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
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फाइल फोटो
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राहुल शर्मा, प्रयागराज। इलाहाबाद जंक्शन पर गदहा लाइन के नाम से चर्चित प्लेटफार्म नंबर पांच का जल्द ही अस्तित्व मिट जाएगा। कई वर्षों से बंद पड़े प्लेटफार्म नंबर पांच का रेलवे प्रशासन नंबर चार में विलय करने जा रहा है। इसके विलय के बाद इलाहाबाद जंक्शन पर 11 नहीं, बल्कि दस ही प्लेटफार्म रह जाएंगे। हालांकि अभी प्लेटफार्म नंबर 11 निर्माणाधीन है लेकिन, इसके पूर्ण होने के बाद इसे अब प्लेटफार्म नंबर छह से जाना जाएगा।
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इलाहाबाद जंक्शन पर मौजूदा समय कुल दस प्लेटफार्म हैं, जबकि 11 नंबर का निर्माण तकरीबन पूरा होने वाला है। वर्तमान समय जंक्शन पर कहने के लिए तो कुल दस प्लेटफार्म हैं लेकिन, ट्रेनों का आवागमन कुल नौ प्लेटफार्म से ही होता है। ऐसा इसलिए क्योंकि छह से आठ कोच की क्षमता वाले प्लेटफार्म नंबर पांच पर पिछले कई वर्ष से रेल संचालन बंद है। इसका उपयोग अतिरिक्त रेक या प्रदर्शनी ट्रेन रखने के लिए बीच में कुछ बार जरूर हुआ।

इस कारण गदहा लाइन पड़ा नाम-
कई वर्ष पूर्व ऊंचाहार एक्सप्रेस, एजे पैसेंजर प्लेटफार्म नंबर पांच से ही चलती थी। अंग्रेजों के जमाने में इस प्लेटफार्म से ट्रेनों में जानवरों को ढोने का काम भी चलता था। तब गधे, खच्चर आदि जानवर इस प्लेटफार्म से ट्रेनों में चढ़ाए जाते थे। तभी से यह प्लेटफार्म आम बोलचाल की भाषा में गदहा लाइन के नाम से चर्चित हो गया। हालांकि लिखापढ़ी में इसे प्लेटफार्म नंबर पांच ही कहा जाता है। जो प्लेटफार्म नंबर चार के हावड़ा छोर पर ही है।
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ब इसका विलय नंबर चार में किया जा रहा है। जबकि छह नंबर प्लेटफार्म अब पांच नंबर में तब्दील जा जाएगा। इसके अलावा जंक्शन के सिविल लाइंस साइड में बन रहे प्लेटफार्म नंबर 11 को अब छह नंबर के नाम से जाना जाएगा। सात-आठ और नौ-दस प्लेटफार्म पर कोई बदलाव नहीं किया जा रहा।

‘कुंभ के पहले प्लेटफार्म नंबर चार में पांच का विलय हो जाएगा। इसके अलावा प्लेटफार्म नंबर 11 को अब छह नंबर प्लेटफार्म कहा जाएगा। क्योंकि वह एक, दो, तीन, चार, पांच के समानांतर है। ’
अमिताभ, डीआरएम इलाहाबाद।

मजार के पीछे घोड़ा लाइन भी
0 इलाहाबाद जंक्शन पर गदहा लाइन के अलावा घोड़ा लाइन भी है। यहां रेलवे अब अपने वीआईपी सैलून खड़ा करता है। कई वर्ष पूर्व यहां ट्रेनों से घोड़े उतारे एवं चढ़ाए जाते थे। इसी वजह से आम बोलचाल की भाषा में इसे घोड़ा लाइन कहा जाता है। इसके अलावा चुनार लाइन, मिर्जापुर लाइन भी जंक्शन पर है।
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