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पीसीएस के छह अन्य सवालों पर भी आपतियां

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पीसीएस के कई दूसरे सवालों पर भी आपत्तियां
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अभ्यर्थियों ने एनसीईआरटी, सरकारी वेबसाइटों पर बनाया आपत्ति का आधार
उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग में दिया आवेदन, गलत सवाल हटाने की मांग

अमर उजाला ब्यूरो
इलाहाबाद।
पीसीएस प्रारंभिक परीक्षा-2017 के छह सवालों को उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (यूपीपीएससी) ने स्वयं गलत मानते हुए हटा दिया है। इसके बावजूद अभ्यर्थियों ने कई दूसरे प्रश्नों पर भी आपत्तियां दर्ज कराई हैं। प्रतियोगी छात्रों ने एनसीईआरटी, सरकारी वेबसाइटों और विशेषज्ञों की किताबों को आधार बनाकर आपत्ति दर्ज कराई है। अभ्यर्थियों की मांग है कि गलत सवाल हटाए जाएं।
पीसीएस प्रारंभिक परीक्षा में सवाल पूछा गया था कि अकबर के शासनकाल में दक्कन में निम्न पद्धतियों में कौन सा भू-राजस्व वसूली का प्रचलित आधार था। जिनमें चार विकल्प कनकुट, हल की संख्या, जब्त और गल्लाबक्शी दिए गए हैं। प्रतियोगियों के मुताबिक आयोग का उत्तर है, ‘हल की संख्या’, जबकि अलग-अलग किताबों में अलग-अलग जवाब दिए गए हैं। इसी तरह एक सवाल था कि किसने ईस्ट इंडिया कंपनी के बारे में यह टिप्पणी की थी कि कंपनी एक असंगठित है परंतु यह उस व्यवस्था का भाग है जहां सबकुछ ही असंगत है? इसके सवाल के चार विकल्प दिए गए हैं, जिनमें वारेन हेस्टिंग, जीबी मैकाले, लार्ड क्लाइव एवं हेनरी डुंडास के नाम शामिल हैं। आयोग ने जीबी मैकाले को सही उत्तर माना है।
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प्रतियोगियों का कहना है कि सही नाम ‘जीबी मैकाले’ नहीं, बल्कि ‘टीबी मैकाले है।’ इस तरह एक सवाल पूछा गया था कि निम्नलिखित लोहा और इस्पात कारखानों में से कौन सा कच्चे माल क्षेत्र के समीप नहीं है? आयोग ने दुर्गापुर को सही उत्तर माना है जबकि प्रतियोगियों का दावा है कि एनसीईआरटी की किताब और सरकारी वेबसाइट के आधार पर सही उत्तर सेलम है। इसी प्रकार कुछ अन्य प्रश्नों पर भी आपत्तियां की गई हैं और सरकारी वेबसाइटों, विशेषज्ञों की किताबों को इसका आधार बनाया गया है।
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