राजकीय इंटर कालेजों के पद प्रतिनियुक्ति से भरने पर रोक
0 9342 पदों पर सीधी भर्ती का मामला, परीक्षा कराने के बाद प्रतिनियुक्ति का निर्णय लेने को चुनौती
अमर उजाला ब्यूरो
इलाहाबाद।
प्रदेश के राजकीय इंटर कॉलेजों में रिक्त 9342 एलटी ग्रेड अध्यापकों के पदों पर रिटायर्ड शिक्षकों और बेसिक एजूकेशन बोर्ड के तहत कार्यरत शिक्षकों को प्रतिनियुक्ति पर रखने के निर्णय पर हाईकोर्ट ने रोक लगा दी है। प्रदेश सरकार ने 21 अगस्त 2017 को शासनादेश जारी कर यह निर्णय लिया था कि इन पदों पर सीधी भर्ती की प्रक्रिया पूरी होने तक प्रतिनियुक्ति पर अध्यापकों को रखा जाएगा। शासनादेश को राहुल सिंह, प्रभाकर चौहान और पंकज सिंह आदि ने याचिका दाखिल कर चुनौती दी थी। याचिका पर सुनवाई कर रहे न्यायमूर्ति पीकेएस बघेल ने प्रदेश सरकार से इस मामले पर जानकारी तलब की है।
याची के अधिवक्ता सीमांत सिंह के मुताबिक अपर निदेशक (माध्यमिक) शिक्षा निदेशालय, इलाहाबाद ने 19 दिसंबर 2016 को राजकीय इंटर कालेजों में 9342 पदों पर एलटी ग्रेड टीचरों की नियुक्ति के लिए विज्ञापन जारी किया गया था। इस पर लिखित परीक्षा करा ली गई, मगर परिणाम जारी नहीं किया गया। इस बीच 21 अगस्त 2017 को शासनादेश जारी कर निर्णय लिया गया कि रिक्त पदों पर सेवानिवृत्ति अध्यापकों और बेसिक शिक्षकों की तैनाती प्रतिनियुक्ति पर मानदेय पर की जाएगी। शासन ने 23 अगस्त 2017 को उत्तर प्रदेश अधीनस्थ शिक्षा (प्रशिक्षित स्नातक) सेवा नियमावली में संशोधन करते हुए निर्णय लिया कि लिखित परीक्षा लोक सेवा आयोग उत्तर प्रदेश के द्वारा कराई जाएगी। इस नियमावली को तत्काल प्रभाव से लागू करने का निर्णय लिया गया।
अधिवक्ता की दलील थी कि संशोधन का पूर्वगामी प्रभाव नहीं होगा। विज्ञापन इससे पूर्व जारी हो चुका है और परीक्षा भी करा ली गई है। इस स्थिति में परिणाम जारी करने के बजाए पदों को प्रतिनियुक्ति से भरने का निर्णय अवैधानिक है। कोर्ट ने प्रतिनियुक्ति संबंधी 21 अगस्त के शासनादेश पर रोक लगाते हुए प्रदेश सरकार से इस मामले में जानकारी मांगी है।